Asthma in Hindi

अस्थमा फेफड़ों के वायुमार्गों की सूजन की बीमारी है जिससे सांस लेने में मुश्किल होती है। यह कुछ शारीरिक गतिविधियों को और भी मुश्किल या असंभव बना सकता है। ब्रोन्कियल अस्थमा अस्थमा का सबसे आम प्रकार है, जो फेफड़ों में ब्रांकाई को प्रभावित करता है। अस्थमा के अन्य रूपों में बचपन में होने वाला अस्थमा और वयस्क होने पर होने वाला अस्थमा हैं| वयस्क होने पर होने वाले अस्थमा में इसके लक्षण कम से कम 20 साल की उम्र तक दिखाई नहीं देते।

अस्थमा के लक्षण तब होते हैं जब वायुमार्ग का अस्तर सूख जाता है और उसके चारों ओर की मांसपेशियां वायुमार्ग को भरने के लिए बलगम पैदा करती हैं, जिससे हवा पास हो सके| इस स्थिति की वजह से छाती में घुटन और खांसी की वजह से अस्थमा का दौरा हो सकता है।

ब्रोन्कियल अस्थमा इलाज योग्य बीमारी नहीं है लेकिन इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स से इलाज़ करने पर फेफड़ों के काम करने को बेहतर बनाया जा सकता है। बेहतर देखभाल से पिछले कुछ दशकों में अस्थमा की वजह से मृत्यु दर कम हो गई है।

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अस्थमा आपके शरीर को कैसे प्रभावित करता है?

अस्थमा ऐसे वायुमार्ग को प्रभावित करता है जो फेफड़ों में ऑक्सीजन लेते या निकालते हैं। अस्थमा रोगियों में इस वजह से वायुमार्ग में परेशानी और सूजन हो जाती है और छाती में सांस की घरघराहट, खांसी और छाती कसने जैसे लक्ष्ण पैदा होते हैं। कुछ लोगों में अस्थमा के लक्षण केवल तभी दिखाई देते हैं जब उन्हें एलर्जी होती है जबकि अन्यों में इस प्रकार का अस्थमा होता है कि हर समय सांस लेना मुश्किल हो जाता है।

अस्थमा के कारण क्या हैं?

जेनेटिक्स – अगर माता-पिता में से एक को अस्थमा हो तो बच्चे को इसके होने का सम्भावना हो सकती है।

वायरल संक्रमण का इतिहास – बचपन में वायरल संक्रमण का इतिहास भी ऐसी स्थिति पैदा कर सकता है।

स्वच्छता की परिकल्पना (हाईजीन हाइपोथिसिस) – जिन बच्चों को शुरूआती महीनों और वर्षों में बैक्टीरिया से अवगत नहीं होते उनमे खराब विकसित प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण ब्रोंकायल अस्थमा हो सकता है और वे अन्य स्थितियों से लड़ नहीं सकते|

अर्ली एलर्जन एक्सपोजर – एलर्जी से लगातार संपर्क में आने से अस्थमा का खतरा बढ़ सकता है।

सांस की बीमारी – फ्लू और निमोनिया ब्रोंकायल अस्थमा के दौरे को ट्रिगर कर सकते हैं।

अस्थमा के दौरे के लिए क्या ज़िम्मेदार है?

लिंग – बचपन में लड़कों में अस्थमा होने की अधिक संभावना है। वयस्क होने पर महिलाओं को अक्सर इस स्थिति से गुजरना पड़ता है।

जेनेटिक्स – दमा की स्थिति वाले माता-पिता से पैदा होने वाले बच्चों में इसके होने की संभावना अधिक रहती है।

स्वास्थ्य का इतिहास – अगर एलर्जी और एक्जिमा जैसी कुछ स्थितियों का निदान हो जाए तो ब्रोन्कियल अस्थमा से बचने का मौका मिल सकता है।

आयु – बचपन के दौरान ही ज्यादातर अस्थमा का पता चलता है।

पर्यावरण – भारी प्रदूषण वाले क्षेत्र में रहने वाले लोगों को भी इसका खतरा बना रहता है।

वजन – अधिक वजन या मोटापे वाले लोगों को अस्थमा होने की सम्भावना रहती है|

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अस्थमा के लक्षण क्या हैं?

अस्थमा के लक्षण अलग-अलग लोगों में अलग होते हैं और यह जरूरी नहीं कि पहले लक्षण के दौरान ही अस्थमा का दौरा हो। यदि आपको निम्न के इलावा अन्य लक्षणों का सामना करना पड़े  तो अपने डॉक्टर से मिलें:

  • साँसों में कमी
  • छाती में कठोरता या दर्द
  • सांस में घरघराहट या खांसी के कारण सोने में परेशानी
  • सांस लेने के दौरान सीटी या घरघर की आवाज
  • सर्दी या फ्लू जैसे सांस के वायरस से खराब होने वाली खांसी या घरघराहट

कभी-कभी ब्रोन्कियल अस्थमा के संकेत और लक्षण कुछ अन्य स्थितियों को पैदा करते हैं:

व्यायाम की वजह से अस्थमा – जब हवा ठंडी और सूखी होती है तो और भी बदतर हो जाता है।

व्यावसायिक अस्थमा – काम की जगह पर होने वाली परेशानियों जैसे रासायनिक धुंआ, गैस या धूल से|

एलर्जी की वजह से अस्थमा – पराग, मोल्ड स्पोर्स, कोक्क्रोच का कचरा या त्वचा के कणों और पालतू जानवरों के सूखे लार जैसे वायुमंडलीय पदार्थ

अस्थमा का पता कैसे लगाया जाता है?

स्वास्थ्य इतिहास – परीक्षण करने पहले आपके डॉक्टर आपका पारिवारिक चिकित्सा इतिहास पूछते हैं|

शारीरिक परीक्षा – स्टेथोस्कोप का उपयोग करके सांस की दर की जांच होती है और त्वचा का परीक्षण भी होता है जोकि एलर्जी प्रतिक्रिया जैसे संकेतों या एक्जिमा के लक्षणों का पता लगाने के लिए किया जा सकता है।

सांस का परीक्षण – फेफड़ों के अंदर और बाहर सांस के आने जाने को मापने के लिए पल्मनरी फ़ंक्शन टेस्ट (पीएफटी) से किया जाता है|

मेथाकोलिन परीक्षण – यह परीक्षण अस्थमा के बारे में बताता है, जब सांस लिया जाता है तो वायुमार्गों को हल्के से कसने का कारण बनता है।

इमेजिंग टेस्ट – किसी भी संरचनात्मक असामान्यताओं या बीमारियों की पहचान करने के लिए फेफड़ों और नाक की गुहाओं (साइनस) का और छाती का एक्स-रे या कम्प्यूटरीकृत टोमोग्राफी (सीटी) स्कैन कराया जाता है जो सांस लेने की समस्याओं का कारण पता लगाने के लिए किया जाता है|

व्यायाम और सर्दी की वजह से अस्थमा के लिए परीक्षण – किसी भी जोरदार शारीरिक गतिविधि को करने से पहले और बाद में वायुमार्ग में होने वाली बाधा को नापने के लिए ठंडी हवा की कई बार सांस लेने का परीक्षण किया जाता है।

अस्थमा को कैसे रोकें और नियंत्रित करें?

ट्रिगर्स से बचें – रसायनों, खुशबुओं या उत्पादों के साथ संपर्क से बचना चाहिए जिनके कारण सांस लेने में समस्याएं आती हैं|

अस्थमा का उपचार – एलोपैथिक उपचार

ब्रोन्कियल अस्थमा के इलाज के लिए उपयोग की जाने वाली दवाएं निम्न हैं:

इनहेलर्स और नेबुलाइजर्स – जिन्हें फेफड़ों में गहराई से सांस लेने की जरूरत होती है उनमे इन दवाओं का प्रयोग किया जाता है|

ब्रोंकोडाइलेटर – ये फेफड़ों की कड़ी मांसपेशियों को आराम देते हैं जैसे कि थियोफाइललाइन।

एंटी-इंफ्लेमेटरीज़ – फेफड़ों में सूजन जो सांस लेने से रोक सकती है, उदाहरण के लिए, लयूकोटरीन मोडीफायरज़

रेसलिज़ुम्ब (सिन्कैर) जैसे इम्मुनोडीलेटरस – नियमित रूप से अस्थमा की दवाओं का प्रयोग किया जाता है। यह अस्थमा के लक्षण पैदा करने में मुख्य भूमिका निभाते हुए ईसीनोफिल की संख्या को कम करने का काम करता है।

अस्थमा का उपचार – होम्योपैथिक उपचार

नेट्रम सल्फ़ – यह दवा बच्चों और वंशानुगत अस्थमा वाले लोगों को दी जाती है। मौसम की स्थिति जैसे नमी और आर्द्रता के हमलों को प्रभावी ढंग से इसे निपटा सकता है।

आर्सेनिक एल्बम – पहले चरण से गंभीर चरण या तीव्र स्थिति तक का प्रभावी ढंग से इलाज किया जा सकता है।

काली कार्ब – विशेष रूप से सुबह के समय के दौरान अस्थमा के दौरे को इस दवा से रोका जा सकता है।

सम्बुकुस – बच्चों में ब्रोन्कियल अस्थमा के लिए यह मुख्य होम्योपैथिक उपचारों में से एक है जब दौरे अचानक रात में आते हैं।

अस्थमा – जीवन शैली के टिप्स

  • अपने आहार में कैफीन या कैफीन वाले पेय जरूर लें|
  • सरसों के तेल से मालिश करें।
  • स्वस्थ आहार खाएं|
  • वजन स्वस्थ बनाए रखें।
  • धूम्रपान छोड़ दें।
  • नियमित रूप से व्यायाम करें|
  • तनाव से बचें|

अस्थमा वाले व्यक्ति के लिए व्यायाम

  • योग
  • चलना
  • साइकिल चलाना
  • आउटडोर में अभ्यास करते समय सुरक्षा के लिए मास्क पहनें।

अस्थमा और गर्भावस्था – जानने योग्य बातें

  • अस्थमा गर्भावस्था के दौरान लगभग 8 प्रतिशत महिलाओं को प्रभावित करता है।
  • गर्भावस्था के दौरान यदि इसके लक्षण खराब होते हैं तो यह दूसरी और तीसरी तिमाही में ही होने की संभावना है।
  • गर्भवती होने पर ब्रोन्कियल अस्थमा का इलाज करना जरूरी है।
  • इलाज न किए जाने पर अस्थमा सुबह की गंभीर बीमारी, समय से पहले प्रसव, गर्भावस्था की वजह से उच्च रक्तचाप या प्रिक्लेम्पिया जैसी मुश्किलों का कारण बन सकता है।

अस्थमा से संबंधित सामान्य मुश्किलें

  • अस्थमा आपकी दैनिक गतिविधियों में हस्तक्षेप कर सकता है।
  • ब्रोन्कियल ट्यूबों के स्थायी संकुचन से सांस लेने में कठिनाई हो सकती है।
  • कुछ अस्थमा की दवाओं का लंबे समय तक उपयोग करने से दुष्प्रभाव पैदा हो सकते हैं|

सामान्य प्रश्न

रात में अस्थमा क्यों बदतर होता है?

सर्कडियन रिदम कुछ प्राकृतिक हार्मोन होते हैं जो रात में कम स्तर पर होने के कारण रात में अस्थमा के लक्षणों का अनुभव ज्यादा हो सकता है।

क्या बच्चों में अस्थमा ठीक हो सकता है?

वैसे तो अस्थमा जीवनभर की स्थिति है| अक्सर बच्चों में किशोरावस्था के दौरान लक्षण गायब हो जाते हैं लेकिन वे वयस्क होने पर ये लक्ष्ण वापस आ सकते हैं।

क्या दूध वाले उत्पाद अस्थमा की स्थिति और खराब कर सकते हैं?

दूध और उससे बने अन्य खाद्य उत्पाद आमतौर पर अस्थमा के लक्षण पैदा नहीं करते जब तक कि किसी व्यक्ति को उनसे एलर्जी ना हो|

क्या कोई व्यक्ति बेहतर महसूस करने के बाद दवा लेना बंद कर सकता है?

नहीं, जब तक कि आपका डॉक्टर आपको दवा बंद करने को ना बताये|

क्या कोई व्यक्ति अस्थमा की दवाओं के आदी हो सकता है?

अस्थमा की दवा नशे की लत नहीं है।

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