Cystic Fibrosis in Hindi

सिस्टिक फाइब्रोसिस (सीएफ) एक विरासत में मिलने वाला विकार है जो ज्यादातर फेफड़ों, जिगर, गुर्दे और आंतों के साथ फेफड़ों को भी प्रभावित करता है। यह इलेक्ट्रोलाइट परिवहन प्रणाली में बदलाव का कारण बनता है जिससे कोशिकाएं बहुत अधिक सोडियम और पानी सोख लेती हैं।

यह उन कोशिकाओं को प्रभावित करता है जो बलगम, पसीने और पाचन रस पैदा करते हैं जो आमतौर पर पतले और फिसलन भरे होते हैं लेकिन सिस्टिक फाइब्रोसिस वाले लोगों में दोषपूर्ण जीन इनको चिपचिपा और गाढ़ा बनने का कारण होता है। यह बहाव तब ट्यूब, नलिकाओं और रास्तों को बंद कर देते हैं विशेष रूप से फेफड़ों और पैनक्रिया में।

जब आमतौर पर वजन बढना और शरीर के बढने को रुकना, नमकीन पसीना आना और लगातार खांसी और सांस में घरघराहट की आवाज़ फाइब्रोसिस के पहले लक्षण हैं| इसके लिए कोई भी स्थायी इलाज नहीं है। इसका उपचार केवल लक्षणों को आसान बनाता है, मुश्किलों को रोकता है और इलाज रोग के बढने को धीमा करता है।

इसमें औसत जीवन की उम्मीद 42 से 50 वर्ष के बीच है और सिस्टिक फाइब्रोसिस वाले 80% लोगों की मृत्यु के लिए जिम्मेदार है। उत्तरी यूरोपीय लोगों में यह सबसे आम है और हर 3,000 नवजात बच्चों में से एक को प्रभावित करता है। यह अनुमान लगाया गया है कि हर 25 लोगों में से एक को यह होता है। अफ्रीका और एशियाई लोगों में यह कम से कम आम है।

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सिस्टिक फाइब्रोसिस आपके शरीर को कैसे प्रभावित करता है?

सिस्टिक फाइब्रोसिस सांस की प्रणाली, पाचन तंत्र और प्रजनन प्रणाली सहित बच्चों और युवा वयस्कों की विभिन्न अंग प्रणालियों को प्रभावित करता है।

असामान्य इलेक्ट्रोलाइट परिवहन प्रणाली (एब्नार्मल इलेक्ट्रोलाइट ट्रांसपोर्ट सिस्टम) श्वसन प्रणाली विशेष रूप से फेफड़ों की कोशिकाओं द्वारा बहुत अधिक सोडियम और पानी के अवशोषित होने का कारण बनती है। इससे फेफड़ों में सामान्य पतला बहाव बहुत गाढ़ा हो जाते है और आगे बढ़ने में मुश्किल होती है जो लगातार सांस के संक्रमण के जोखिम को बढ़ाती है। बार-बार सांस के संक्रमण से हानि से फेफड़ों की कोशिकाओं की मृत्यु हो जाती है। श्वसन पथ के निचले हिस्से के संक्रमण की उच्च दर से पुरानी खांसी, बलगम में खून आना विकसित करती है और अक्सर फेफड़ों के पतन का कारण होती है।

सिस्टिक फाइब्रोसिस के कारण क्या हैं?

यह विरासत से होता है और सिस्टिक फाइब्रोसिस ट्रांसमेम्ब्रेन आचरण नियामक (सीएफटीआर) प्रोटीन के लिए जीन की दोनों प्रतियों में उत्परिवर्तन की उपस्थिति के कारण होता है। एक ही काम करने वाले लोग इसके वाहक होते हैं अन्यथा बाकि सब सामान्य होते हैं लेकिन सीएफ से प्रभावित लोगों में प्रत्येक माता-पिता से जीन की एक ही प्रति होती है।

सिस्टिक फाइब्रोसिस के खतरे के लिए क्या कारक हैं?

पारिवारिक इतिहास – सिस्टिक फाइब्रोसिस विरासत में मिलने वाला विकार है।

रेस – यह उत्तरी यूरोपीय वंश के लोगों में सबसे आम है।

सिस्टिक फाइब्रोसिस के लक्षण क्या हैं?

सीएफ वाले लोगों के पसीने में नमक सामान्य स्तर से अधिक होता है|

सीएफ के निदान से वयस्कों में अग्नाशयशोथ, बांझपन और पुनरावर्ती निमोनिया होने की संभावना अधिक होती है

श्वसन संकेत और लक्षण:

  • गाढ़ी बलगम वाली लगातार खांसी
  • घरघराहट
  • व्यायाम के लिए असहनीयता
  • फेफड़ों का संक्रमण दोबारा होना
  • नाक के रास्ते में सूजन या भरी हुई नाक

पाचन के संकेत और लक्षण

  • दुर्गन्ध, चिकना मल
  • वजन का बढ़ना और खराब विकास
  • नवजात शिशुओं में आंतों का अवरोध
  • गंभीर कब्ज
  • रेक्टल प्रोलपस (जब यह बच्चों में होता है, यह सिस्टिक फाइब्रोसिस का संकेत हो सकता है)
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सिस्टिक फाइब्रोसिस का निदान कैसे किया जाता है?

नवजात शिशुओं में सिस्टिक फाइब्रोसिस की जांच की जाती है। बीमारी के लक्षणों की जांच के लिए आनुवंशिक या खून की जांच की जाती है। आनुवांशिक परीक्षण से यह पता लगता है कि बच्चे के दोषपूर्ण सीएफटीआर जीन है या नहीं। खून की जांच यह तय करती है कि बच्चे की  पैनक्रिया और जिगर सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं।

इम्यूनोरिएक्टिव ट्रिप्सिनोजेन (आईआरटी) टेस्ट – यह एक मानक नवजात स्क्रीनिंग जांच होती है जो खून में आईआरटी नामक प्रोटीन के असामान्य स्तर की जांच करता है। आईआरटी के उच्च स्तर से सिस्टिक फाइब्रोसिस का संकेत दे सकता है।

स्वेट क्लोराइड टेस्ट – सिस्टिक फाइब्रोसिस का निदान करने के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल की  जाने वाली जांच पसीने में नमक के बढ़े हुए स्तर की जांच है।

स्पुटम टेस्ट – यह परीक्षण फेफड़ों में संक्रमण की उपस्थिति की पुष्टि कर सकता है और यह भी दिखा सकता है कि जीवाणुओं के कौन से प्रकार मौजूद हैं और यह तय करते हैं कि कौन से एंटीबायोटिक्स उनके इलाज के लिए सबसे अच्छा काम करते हैं।

चेस्ट एक्स-रे – श्वसन मार्ग में रुकावट के कारण फेफड़ों में सूजन देखने के लिए उपयोगी है|

सी.टी स्कैन – यह जिगर और पैनक्रिया जैसी आंतरिक संरचनाओं को देखने के काम आता है, जिससे सिस्टिक फाइब्रोसिस के कारण अंगों को होने वाली हानि का पता चलता है|

पल्मनरी फंक्शन टेस्ट (पीएफटी) – यह जांच यह नापने में मदद करती है कि कितनी हवा को सांस द्वारा निकाला या लिया जा सकता है और फेफड़ों के शरीर के बाकी हिस्सों में ऑक्सीजन कितनी अच्छी तरह से जाती है।

सिस्टिक फाइब्रोसिस को कैसे रोकें और नियंत्रित करें?

यदि आपको या आपके साथियों को यह है तो बच्चा होने से पहले इसका परीक्षण करें। यह सिस्टिक फाइब्रोसिस के साथ बच्चे होने के खतरे को तय करने में मदद कर सकता है।

सिस्टिक फाइब्रोसिस का उपचार – एलोपैथिक उपचार

नसल पॉलीप रिमूवल – नाक के पॉलीप्स को हटाना जो सांस लेने में बाधा डालते हैं|

ऑक्सीजन थेरेपी – फेफड़ों में उच्च रक्तचाप को रोकने के लिए (हाइपरटेंशन)।

एंडोस्कोपी और लैवेज – एंडोस्कोपी के द्वारा बलगम के कारण बंद हुए वायुमार्गों को सक्शन करके हटाने के लिए।

आँतों की सर्जरी – यदि आँतों में रूकावट होती है तो शल्य चिकित्सा करवाकर मरम्मत की जरूरत हो सकती है।

फेफड़ों का प्रत्यारोपण – सांस की गंभीर समस्याओं में, फेफड़ों की परेशानियों में या फेफड़ों के संक्रमण के इलाज के लिए प्रयुक्त एंटीबायोटिक्स के प्रतिरोध में बढ़ावा होने पर फेफड़ों का प्रत्यारोपण ही एक विकल्प हो सकता है।

सिस्टिक फाइब्रोसिस के लिए निर्धारित दवाएं निम्न हो सकती हैं:

एंटीबायोटिक्स – फेफड़ों के संक्रमण से छुटकारा पाने के लिए और भविष्य में होने वाले किसी भी अन्य संक्रमण को रोकने के लिए।

बलगम पतली करने वाली दवाएं – बलगम को पतला और कम चिपचिपा बनाने वाली दवाएं जो फेफड़ों के काम में काफी सुधार करती हैं|

नॉन-स्टेरॉयडल दवाएं (NSAIDs) – इबूप्रोफेन और इंडोमेथेसिन, सिस्टिक फाइब्रोसिस से जुड़े किसी भी दर्द और बुखार को कम करने में मदद कर सकते हैं।

ब्रोंकोडाइलेटर – यह ट्यूब के चारों ओर मांसपेशियों को आराम करने में मदद करता है जो फेफड़ों में हवा लेते हैं उनके वायु के बहाव को बढ़ावा देने में मदद करता है।

सिस्टिक फाइब्रोसिस का उपचार – होम्योपैथिक उपचार

एंटीमोनियम टारटेरिकम – यह गीली, झटकेदार खांसी के लिए है जो चरम थकान और सांस लेने की समस्याओं वाली होती है। जब व्यक्ति लेटता है तो लक्षण और भी खराब हो जाते हैं।

कार्बो वेजिटेबिलिस – यह दवा चिंता, सर्दी और नीली त्वचा के वाली सांस की तकलीफ के लिए है।

सिस्टिक फाइब्रोसिस – जीवन शैली के लिए टिप्स

  • एंटी-एसिड लें
  • उच्च कैलोरी वाला पोषण लें
  • विशेष फैट में घुलनशील विटामिन
  • अपने आहार में आंतों के अवरोध को रोकने के लिए अतिरिक्त फाइबर शामिल करें
  • हाइड्रेट रहें
  • टीकाकरण करवाते रहें
  • नियमित रूप से व्यायाम करें
  • धूम्रपान छोड़ दें
  • हाथ धोने को प्रोत्साहित करें

सिस्टिक फाइब्रोसिस वाले व्यक्ति के लिए क्या व्यायाम हैं?

सिस्टिक फाइब्रोसिस वाले व्यक्ति के लिए निम्न व्यायाम की सिफारिश की जाती है:

  • चलना
  • साइकिल चलाना
  • दौड़ना
  • तैराकी

सिस्टिक फाइब्रोसिस और गर्भावस्था – जानने योग्य बातें

गर्भवती सीएफ वाली महिलाओं को गैर-सिस्टिक फाइब्रोसिस महिलाओं की तुलना में गर्भावस्था के दौरान ज्यादा चिकित्सा देखभाल और परेशानियों का सामना करना पड़ता है|

अंडरलायिंग सिस्टिक फाइब्रोसिस से संबंधित मधुमेह मेलिटस संभवतः दिखाई देता है और तीव्र उपचार की जरूरत होगी और वजन बढ़ना मुश्किल हो सकता है।

सिस्टिक फाइब्रोसिस से संबंधित सामान्य परेशानियाँ

सिस्टिक फाइब्रोसिस के कारण निम्न परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है:

  • श्वसन प्रणाली की परेशानी
  • ब्रोन्ककाइटेसिस
  • पुराना संक्रमण (इन्फेक्शन)
  • नाक में मांस बढना (नोज पॉलीप्स)
  • खांसी में खून (हेमोप्टाइसिस)
  • नयूमोथोरक्स
  • एक्यूट एक्सासरबेशन
  • पाचन तंत्र की परेशानी
  • मधुमेह
  • पित्त नाली में रूकावट
  • अंतड़ियों में रुकावट
  • प्रजनन प्रणाली की परेशानियां
  • हड्डियों का पतला होना (ऑस्टियोपोरोसिस)
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