Diphtheria in Hindi

डिप्थीरिया जीवाणु कोरिनेबैक्टीरियम डिप्थीरिया के कारण होने वाला एक गंभीर संक्रमण है। यह नाक और गले की श्लेष्म झिल्ली (म्यूकस मेम्ब्रेन) को प्रभावित करता है। डिप्थीरिया का एक विशेष संकेत गले के पीछे की मोटी, भूरे रंग की सामग्री की एक शीट है, जो वायुमार्ग में रूकावट कर सकती है, जिससे सांस लेने में मुश्किल होती है।

ये लक्षण हर व्यक्ति में अलग होते हैं और आमतौर पर दो से पांच दिन बाद ही शुरू होते हैं। गले में बढ़े हुए लिम्फ नोड्स के कारण बुखार और सूजन गर्दन (भागों में) से शुरू होते हैं। डिप्थीरिया सीधे संपर्क में आने से या हवा के द्वारा और दूषित वस्तुओं से भी लोगों में फैल सकता है। इससे पैदा होने वाले लक्षण बैक्टीरिया के द्वारा पैदा विष के कारण होते हैं। 3 अलग-अलग प्रकार के बैक्टीरिया होते हैं जो रोग की विभिन्न गंभीरताओं का कारण बनते हैं।

सूक्ष्मजीव-विज्ञान संस्कृति द्वारा पुष्टि से गले की उपस्थिति के आधार पर निदान किया जा सकता है। इस रोग की रोकथाम के लिए डिप्थीरिया का टीका प्रभावी होता है। गंभीर मसलों में, वायुमार्ग को खोलने के लिए ट्रेकोटॉमी की जरूरत होती है। सन 2015 में इसके दुनिया भर में 4,500 मामले सामने आए| डिप्थीरिया अक्सर सब-सहारा अफ्रीका, भारत और इंडोनेशिया में होता है।

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डिप्थीरिया आपके शरीर को कैसे प्रभावित करता है?

डिप्थीरिया सांस लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है क्योंकि सांस लेने का रास्ता गहरे भूरे रंग के कोटिंग से घिर जाता है जो खुद ही गले के पिछले भाग से अलग हो जाता है। इसके अलावा बैक्टीरिया एक विष जैसा पैदा करता है जो चेहरे की मांसपेशियों, गले, बाहों और पैरों से जुडी नसों को नुकसान पहुंचा सकता है। तंत्रिका त्तन्त्र को नुक्सान पहुंचने से निगलना मुश्किल हो जाता है और आंखों, बाहों या पैरों को गति देने में दिक्कत होती है। विषाक्त पदार्थ गुर्दे को नुकसान पहुंचाते हैं और हृदय की मांसपेशियों में सूजन लाता है जिससे दिल की असामान्य धड़कन, हृदय की समस्याएं और यहां तक ​​कि मौत भी हो सकती है। कुछ मामलों में आँखें भी प्रभावित हो सकती है।

डिप्थीरिया के क्या कारण हैं?

कैरीनेबैक्टीरियम डिप्थीरिया ही डिप्थीरिया होने का मुख्य कारण है। यह बैक्टीरिया आम तौर पर गले की श्लेष्म झिल्ली की सतह पर या उसके करीब बढ़ता है और बैक्टीरिया के माध्यम से फैल सकता है:

  • एयरबोर्न ड्रापलेट्स – जब कोई संक्रमित (इन्फेक्टेड) व्यक्ति छींकता या खांसी करता है तो हवा में दूषित बूंदों को छोड़ता है और आसपास के लोग सांस से डिप्थीरिया को ले सकते हैं।
  • दूषित वस्तुएं – कभी-कभी संक्रमित व्यक्ति के इस्तेमाल किए गए घर या व्यक्तिगत सामान का प्रयोग करने से डिप्थीरिया हो सकता है|
  • संक्रमित घाव – संक्रमित घावों के संपर्क में आने से भी डिप्थीरिया हो सकता है।

डिप्थीरिया के खतरे के लिए कौन से कारक हैं?

डिप्थीरिया के खतरे के लिए ज़िम्मेदार कारक निम्न हैं:

  • बच्चे और वयस्क जो टीकाकरण नहीं करवाते
  • उन स्थानों की यात्रा करना जहां डिप्थीरिया स्थानिक होता है
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डिप्थीरिया के लक्षण क्या हैं?

संक्रमण होने के दो से सात दिन बाद डिप्थीरिया के लक्षण शुरू होते हैं:

  • 38 डिग्री सेल्सियस या इससे भी ऊपर का बुखार
  • सर्दी लगना
  • थकान
  • त्वचा का नीला रंग (साइनोसिस)
  • आवाज़ बैठना
  • खाँसी
  • निगलने में मुश्किल
  • सांस लेने में मुश्किल
  • तेजी से साँस लेना
  • गन्दी महक और नाक से खून वाला बहाव
  • लिम्फाडेनोपैथी

संक्रमण के दो से तीन दिनों के भीतर ही डिप्थीरिया सांस लेने के तंत्र में स्वस्थ ऊतकों को नष्ट कर सकता है जिससे ये मरे हुए ऊतक गले या नाक में एक मोटी, भूरे रंग की कोटिंग बना सकते हैं। यह नाक, टान्सिल, वॉयस बॉक्स और गले के ऊतकों को धक देता है, जिससे सांस लेने और निगलने में मुश्किल होती है।

डिप्थीरिया की पहचान कैसे की जाती है?

  • डिप्थीरिया को आम तौर पर सूजे हुए गले और टॉन्सिल्स या गले को ढंकने वाली भूरे रंग की झिल्ली को देखकर पहचाना जाता है।
  • थ्रोट कल्चर की जांच के लिए गले से लिए गये नमूने से डिप्थीरिया की पहचान करने में मदद मिल सकती है।

डिप्थीरिया को कैसे रोकें और नियंत्रित करें?

टीकाकरण – डिप्थीरिया का टीका आमतौर पर टेटनस और पेट्यूसिस की टीका के साथ ही मिलता  है, जिसे आमतौर पर डीटीपी के नाम से जाना जाता है। यह टीकाकरण इस बीमारी को रोकने में मदद कर सकता है।

बूस्टर शॉट्स – डिप्थीरिया के खिलाफ बने रहने में मदद के लिए टीकाकरण के बाद बूस्टर शॉट्स बाद में दिए जाते हैं।

डिप्थीरिया का उपचार – एलोपैथिक उपचार

गंभीर मामलों में, गर्दन में लिम्फ नोड्स सूख सकते हैं और सांस लेने और निगलने में मुश्किल हो जाती है इस मामले में इंट्यूबेशन या ट्रेकेटोमी की जरूरत हो सकती है। गंभीर मामलों वाले मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया जाता है और उन्हें एंटीटॉक्सिन का इंजेक्शन नसों या मांसपेशियों में दिया जाता है। यह पहले से ही शरीर में फैलते हुए डिप्थीरिया के विषैले पदार्थ को बेअसर कर देता है।

एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग कैरियर या सी. वाले मरीजों में डिप्थीरिया को खत्म करने और दूसरों में इसके फैलने को रोकने के लिए किया जाता है। निम्न दवाएं भी दी जाती हैं:

  • मेट्रोनिडाजोल
  • इरीथ्रोमाइसीन
  • प्रोकेन पेनिसिलिन-जी (पेनिसिलिन-जी या एरिथ्रोमाइसिन से एलर्जी वाले रोगी रिफाम्पिन या क्लिंडामाइसिन का उपयोग कर सकते हैं)

डिप्थीरिया का उपचार – होम्योपैथिक उपचार

  • डिफथेरिनम
  • एपिस मेल – यह तब दिया जाता है जब गले के एडीमा में दर्द होते हैं|
  • ब्रोमियम – यह डिप्थीरिया के लिए बहुत प्रभावी है और ऊपर की ओर महसूस किये जाने वाले छाती के दर्द का सामना करने वाले मरीज को दिया जाता है।
  • क्रोटेलस होरिडस – हेम्मोरेजिक प्रवृत्ति व् गंभीर रक्तचाप वाले घातक डिप्थीरिया के रोगियों को दिया जाता है।
  • काली बाईक्रोमिक्म – यह दवा इसलिए दी जाती है जब छोटे धब्बों में दर्द तक सीमित होता है।
  • लैचेसिस – यह उन मरीजों के लिए है जिन्हें सर्दी और दर्द महसूस होता है जो नींद के बाद और भी बदतर हो जाता है। तरल या लार निगलने पर भी यह बहुत दर्दनाक होता है।
  • मरक्यूरिअस क्यनाटेस – यह उन रोगियों के लिए है जिनके गले में झिल्ली जमा हो जाती है।
  • नाज़ा ट्री – जब दिल का असरदार पक्षाघात होता है और रोगी नीला होता है और नींद से जाग जाता है तब इस दवा का प्रयोग किया जाता है|

डिप्थीरिया – जीवन शैली के टिप्स

पूरा आराम पाने के लिए उचित बेडरेस्ट करें|

बीमारी को आगे फैलने से रोकने के लिए संक्रमित लोगों को अलग रहना चाहिए|

गले के दर्द को कम करने में मदद के लिए एक तरल आहार लें|

टीकाकरण का कोर्स पूरा करें|

डिप्थीरिया वाले व्यक्ति के लिए क्या व्यायाम हैं?

डिप्थीरिया के रोगियों के लिए कोई विशेष व्यायाम की सलाह नहीं दी जाती|

डिप्थीरिया और गर्भावस्था – जानने योग्य बातें

वयस्कों में डिप्थीरिया दुर्लभ है और गर्भवती महिलाओं में डिप्थीरिया की घटना अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं की गई है। प्रारंभिक गर्भावस्था में होने वाले डिप्थीरिया भ्रूण प्रतिरक्षा की प्रतिक्रियाओं पर कोई प्रभाव ज्ञात नहीं हैं।

डिप्थीरिया से जुडी सामान्य परेशानियाँ

  • मायोकार्डिटिस – इसके कारण दिल की धड़कन असामान्य हो सकती है
  • नसों की सूजन – इसके कारण पक्षाघात हो सकता है
  • गुर्दे से जुडी समस्याएं
  • प्लेटलेट के कम स्तर के कारण रक्तस्राव की समस्याएं
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