एक लोकप्रिय मिथक के अनुसार पुष्कर का ब्रह्मा मंदिर दुनिया का एकमात्र ब्रह्मा मंदिर है।लेकिन यह सच नहीं है। कुछ लोग कहते हैं कि ब्रह्मा अपनी बेटी से मुग्ध था इसलिए उसने खुद को 5 सिर दिए। क्योंकि यह संबंध अपवित्र और अनुचित था तो भगवान शिव ने ब्रह्मा के पांचवें सिर को काट दिया और तब से उन्हें त्रिमूर्ति से अनदेखा कर दिया गया। अन्य कथाओं के अनुसार जिस तरह ब्रह्मा ने किसी को भी वरदान दिया यहां तक ​​कि हिरण्यकश्यिप जैसे राक्षस को भी तो लोगों ने उनकी पूजा करना बंद कर दिया। इतनी कम संख्या में उनके मंदिर होना का यही कारण है| लेकिन ये 6 ब्रह्मा मंदिर यात्रा के लायक हैं।

भारत के 6 ब्रह्मा मंदिरों की सूची

1. ब्रह्मा मंदिर, पुष्कर

यह मंदिर राजस्थान के अजमेर जिले में पुष्कर झील पर स्थित है। यहाँ यात्रा करने के लिए सबसे अच्छा समय हिन्दुओं के कार्तिक महीने के दौरान होता है। यहाँ लोग प्रार्थना करने से पहले झील में डुबकी लगाते हैं। यह मंदिर बहुत खूबसूरती से बना हुआ है और यहाँ के आसपास के इलाकों में मोर भी देखे जा सकते हैं।

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2. असोत ब्रह्मा मंदिर

राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थित यह मंदिर गांव के राजपुत्रों ने बनवाया था। यह मंदिर जैसलमेर और जोधपुर के पत्थर से बना है लेकिन ब्रह्मा की मूर्ति संगमरमर से बनी है।

3. आदि ब्रह्मा मंदिर

आदि ब्रह्मा मंदिर कुल्लू घाटी के खोखन क्षेत्र में है। उस जगह के लोगों के आसपास बौद्ध प्रभाव होने से इसका नाम “आदि” हो गया| इस मंदिर की वास्तुकला हिमालयी पगोडा शैली जैसी दिखाई देती है।

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4. ब्रह्मा मंदिर, कुम्भकोणम

एक पौराणिक कथा के अनुसार ब्रह्मा को सृष्टि की अपनी शक्ति पर इतना घमंड हो गया था कि वह विष्णु और शिव के प्रति भी घमंडी हो गए। तब विष्णु ने ब्रह्मा को डराने के लिए एक भूत बनाया। उससे डरकर ब्रह्मा ने अपने बुरे व्यवहार के लिए के लिए विष्णु से माफ़ी मांगी। विष्णु ने उन्हें पृथ्वी पर तपस्या करने के लिए कहा। तब ब्रह्मा ने कुम्भकोणम को चुना और वहीँ उनका मंदिर बनाया गया।

5. ब्रह्मा कर्मली मंदिर

यह ब्रह्मा मंदिर पणजी, गोवा से 60 कि.मी दूर है। ऐसा माना जाता है कि यहां की मूर्ति 11वीं शताब्दी की है। लेकिन यह मंदिर ज्यादा पुराना नहीं है। यह गोवा का एकमात्र ब्रह्मा मंदिर है। लोग 20वीं शताब्दी में पुर्तगालियों की धार्मिक असहिष्णुता से बच निकले थे। ऐसा माना जाता है कि तभी ब्रह्मा जी की काले पत्थर की मूर्ति यहां रखी गई थी।

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6. ब्रह्मपुरेश्वर मंदिर

ऐसा कहा जाता है कि एक बार पार्वती ने ब्रह्मा को शिव मान लिया था। जिस वजह से गुस्से में शिव ने ब्रह्मा के एक सिर को काट दिया था और उसे अपनी शक्तियों से अलग कर दिया था। शिव से माफ़ी मांगने की कोशिश में ब्रह्मा तीर्थयात्रा पर चले गए| उन्होंने तब तिरुपति में 12 शिवलिंग स्थापित किए और वहां शिव की पूजा की। उनसे प्रभावित होकर शिव ने उनकी सभी शक्तियों को वापिस कर दिया। उन्होंने मंदिर में ब्रह्मा को एक मंदिर का आशीर्वाद दिया।

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