Glaucoma in Hindi

ग्लूकोमा एक प्रकार का आंख विकार है जो ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाता है जो आंख से जानकारी को मस्तिष्क तक ले जाती है। शुरुआत में ग्लूकोमा के आमतौर पर कोई लक्षण नहीं दिखते, इसे इतना खतरनाक यह बनाता है कि जब आप अपनी नजर की समस्याएं देखते हैं, तब तक बीमारी इस हद तक बढ़ जाती है कि आपकी ना ठीक होने वाली नजर की हानि पहले से ही हो चुकी होती है और अतिरिक्त नुकसान को रोकना और भी मुश्किल हो जाता है|

ग्लूकोमा की दो प्रमुख श्रेणियां ओपन एंगल ग्लूकोमा (ओएजी) और नैरो एंगल ग्लूकोमा हैं। दोनों मामलों में “एंगल” आंख के अंदर पानी को निकालने वाले एंगल के बारे में कहा गया है जो आँखों के पानी के बहने को नियंत्रित करता है जो आंखों के अंदर लगातार बनता रहता है। यदि यह पानी जल निकलने के एंगल पहुंच जाता है तो ग्लूकोमा को ओपन एंगल ग्लूकोमा के रूप में जाना जाता है। यदि जल निकलने का एंगल बंद होता है और पानी इस तक नहीं पहुंच सकता है तो ग्लूकोमा को नैरो एंगल ग्लूकोमा के रूप में जाना जाता है।

ज्यादातर मामलों में ग्लूकोमा आंख के अंदर सामान्य से अधिक दबाव के साथ जुड़ा होता है – एक ऐसी परिस्थिति जिसे ओकुलर हाइपरटेंशन कहा जाता है। लेकिन यह तब भी हो सकता है जब इंट्राओकुलर दबाव (आईओपी) सामान्य है। अगर इलाज न किया जाए तो ग्लूकोमा से पहले पेरीफेरल विज़न लोस हो सकता है और अंत में अंधापन हो जाता है।

अमेरिकन एकेडमी ऑफ ओप्थाल्मोलॉजी के मुताबिक ग्लूकोमा का सबसे आम प्रकार – जिसे प्राथमिक ओपन-एंगल ग्लाउकोमा कहा जाता है – संयुक्त राज्य अमेरिका में अनुमानित 2.2 मिलियन लोगों को प्रभावित करता है, और 2020 तक यह संख्या 3.3 मिलियन तक बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि अमेरिकी आबादी की उम्र ।

ग्लूकोमा के ज्यादातर मामलों में कम या कोई शुरूआती लक्षण नहीं होता इसलिए ग्लूकोमा वाले आधे अमेरिकियों को पता ही नहीं है कि उन्हें यह समस्या है|

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ग्लूकोमा आपके शरीर को कैसे प्रभावित करता है?

ग्लूकोमा इंट्राओकुलर दबाव के बढने के कारण होता है। यह वह दबाव है जो ऑप्टिक नर्व को पर दबाव डालता है और उसे नुक्सान पहुंचाता है। एक बार ऑप्टिक तंत्रिका क्षतिग्रस्त हो जाने पर यह मस्तिष्क को देखने की जानकारी देने में विफल रहता है और इसके परिणामस्वरूप नजर का नुकसान होता है।

ग्लूकोमा के कारण क्या हैं?

ग्लूकोमा का मुख्य कारण एक ऐसा दबाव है जो आंखों में बनाया जाता है और जो ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाता है। ऑप्टिक नर्व उच्च दबाव के लिए आंख का संवेदनशील हिस्सा है क्योंकि ये नसें सीधे दबाव से खराब हो जाती हैं या नर्व के खून के बहाव में कमी आ जाती है।

ज्यादा दबाव और ऑप्टिक नर्व लोस से संबंधित कुछ जीन ग्लूकोमा का कारण बन सकते हैं। कुछ ऐसी स्थितियां जो ग्लूकोमा का कारण बनती हैं जैसे नसें, ट्यूमर, मधुमेह और मोतियाबिंद की सूजन|

ग्लूकोमा के खतरे के कारक क्या हैं?

ग्लूकोमा के सामान्य खतरे के कारक हैं:

  • 45 साल से ऊपर के लोग
  • वंशानुगत ग्लूकोमा
  • इंट्राओकुलर प्रेशर (आईओपी) वाले लोग
  • मायोपिया, मधुमेह, हाइपरोपिया, आंखों की चोट और कॉर्टिकोस्टेरॉइड का लम्बे समय तक उपयोग जैसी चिकित्सा स्थितियां
  • अफ्रीकी-अमेरिकी मूल के लोगों के पास अन्य लोगों की तुलना में ग्लूकोमा विकसित करने की संभावना ज्यादा होती है|

ग्लूकोमा के लक्षण क्या हैं?

ग्लूकोमा के शुरुआती चरण के लक्षण नहीं होते| जब बीमारी पुराणी हो जाती है तभी इसके  निम्न लक्षण प्रकट हो सकते हैं:

  • ग्लूकोमा का पहला संकेत आंख का गंभीर दर्द
  • आंख में लाली
  • विशेष रूप से शिशुओं में धुंधला या क्लाउडी ऑय
  • टनल विज़न
  • सरदर्द
  • पेट की बीमारी (मतली)।
  • किसी भी तरह की रौशनी आसपास इंद्रधनुष जैसा रंग लगना|
  • आंख में सूजन और संक्रमण।

ग्लूकोमा को कैसे पहचाना जाता है?

ग्लूकोमा का पता लगाने के लिए उपयोग की जाने वाली डायग्नोस्टिक विधियां हैं:

इंट्राओकुलर प्रेशर (आईओपी) – इसे आईओपी टोनोमेट्री का उपयोग करके नापा जाता है। इस जांच के दौरान आंखों की सतह पर धीरे-धीरे ऑय ड्रॉप्स का उपयोग करके आंखों की छान-बीन की जाती है। यह आंखों को छूकर उसके दबाव को नापता है। कभी-कभी आंख की सतह पर हवा का एक विस्फोट सा लगता है। सामान्य आईओपी 21 मिमीएचएचजी से कम होना चाहिए। यदि आपका आईओपी 30 एमएमएचजी से बड़ा है तो रौशनी खोने के चरम जोखिम पर हैं।

ऑप्टिक नर्व का आकलन – ऑप्टोमेट्रिस्ट ऑप्टिकल नर्व की स्थिति का आकलन करने के लिए ऑय ड्रॉप्स डालने के बाद स्लिट लैंप का उपयोग करता है| ऑप्टिक नर्व की हानि को देखने के लिए आंखों में एक तेज़ रौशनी पास की जाती है। ऑय ड्रॉप्स पुतली के बढने के लिए उपयोग किये जाते हैं जिनको ड्राइव करने और लंबी दूरी से पढ़ने में मुश्किल होती है। इस जांच के बाद आपके साथ घर जाने के लिए आपके परिवार के किसी सदस्य का होना बहुत जरूरी है।

विसुअल फील्ड टेस्ट या पेरिमीटरी – यह जांच खोयी हुई नज़र के गायब हुए हिस्से को पाने के लिए है। रौशनी की एक श्रृंखला सी दिखाई देती है और स्पॉट को देखने के लिए कहा जाता है और यही आपकी नज़र के क्षेत्र को तय करता है| जिसमें आंखों के किनारों पर कुछ बिंदु दिखाई दे सकते हैं|

कॉर्नियल पैचिमेट्री – कॉर्नियल की ज्यादा मोटाई इंट्राओकुलर दबाव के मूल्यों को बाधित कर सकती है और इसलिए इसे पैचिमेट्री नामक एक उपकरण का उपयोग करके नापा जाता है। यह एक ऐसा उपकरण है जिसमें नोक पर दबाव सेंसर होते हैं जो आंख की सतह (कॉर्निया) पर रखी जाती है। इस प्रक्रिया में लगभग 1 से 2 मिनट लगते हैं।

गोनियोस्कोपी – वह एंगल जहां कॉर्निया और आईरिस मिलते हैं उसे नापा जाता है। इस जांच के दौरान हाथ से चलने वाला संपर्क लेंस आंखों पर धीरे-धीरे रखा जाता है। इस लेंस में एक शीशा होता है जो आईरिस और कॉर्निया के बीच एंगल को दिखाता है कि यह खुला है या बंद है।

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ग्लूकोमा को कैसे रोकें और नियंत्रित करें?

ग्लूकोमा को रोकने के तरीके निम्न हैं:

  • नियमित आंख परीक्षाएं करवाएं
  • चलने, दौड़ने और जॉगिंग जैसे दैनिक अभ्यास में सामान्य आईओपी को बनाए रखने की संभावना होती है।
  • योग अभ्यास के दौरान उलटे आनों जैसे हेडस्टैंड या कंधे के बल खड़े होने से बचना चाहिए।
  • अपनी खेल गतिविधियों और घर बनवाने के दौरान सुरक्षा के लिए चश्मा पहनें।
  • यदि धुंधला दिखाई दे तो तुरंत आंखों की जांच के लिए जाएं।
  • ज्यादा संवेदनशील ग्लूकोमा से प्रभावित होने पर अपने आहार में नमक की ज्यादा मात्रा से बचें।
  • यदि आपको पहले से ग्लूकोमा है तो हाई बीपी को कम करने के लिए कॉफी और कैफीनयुक्त पेय पदार्थों से बचने की कोशिश करें।
  • एक ही घूँट में पीने के पानी से बचें। दिन भर में पानी की कम मात्रा पियें|
  • लाल शराब, हरी चाय और काले चॉकलेट का उपयोग बहुत कम करें।
  • ओमेगा 3-फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थ लें|

ग्लूकोमा का उपचार

आम तौर पर ग्लूकोमा एक ना ठीक होने वाला आंख का विकार है। उपचार और दवा शुरुआती चरणों में नज़र के नुक्सान को कम और धीमा करने में मदद कर सकते हैं| सामान्य उपचार विकल्पों में निम्न हो सकते हैं:

ऑय ड्रॉप्स – इनका उपयोग आईओपी को कम करने और आंख से अतिरिक्त तरल पदार्थ निकलने को कम करने के लिए किया जाता है और यह तरल पदार्थ के कम स्राव के द्वारा द्रव की मात्रा को नियंत्रित करता है।

बीटा-ब्लॉकर्स – यह आंखों में तरल पदार्थ के बहाव को कम करता है, जिससे इंट्राओकुलर क्षेत्र में दबाव कम हो जाता है। उदाहरण के लिए टिमोलोल और बीटाक्सोलोल| असंभव रूप से इसके कुछ दुष्प्रभावों में कम बीपी, धीमी हृदय गति, सांस लेने में कठिनाई, नपुंसकता और थकान हैं।

मयोटिक या कोलिनेर्जिक एजेंट – यह आंख से तरल पदार्थ का बहने को बढ़ाता है। उदाहरण के  लिए पिलोकारपाईन| इससे नजर धुंधली होने, नज़दीकीपन और छोटी पुतलियों जैसे कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं|

अल्फा-एड्रेनर्जिक एगोनिस्ट – यह द्रव के प्रवाह को बढ़ाता है। जैसे: अप्राक्लोनीडाइन और ब्रिमोनिडाइन जिससे अनियमित दिल की धड़कन, आंख लाली या सूजन, कम बीपी, थकान और मुंह सूखना जैसे कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

कार्बनिक एनहाइड्रेज इन्हिबिटर – यह आंखों में द्रव के बनने को भी कम करता है। डोर्जोलामाइड और ब्रिनज़ोलामाइड कुछ कार्बोनिक एनहाइड्रैस होते हैं जिनमें धातु जैसा स्वाद, लगातार पेशाब होना आदि दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

प्रोस्टाग्लैंडिन – यह द्रव के बहने को बढ़ाता है और दबाव को कम करता है। इससे होने वाले साइड इफेक्ट्स में आंखों की लाली, चमक और धुंधली दृष्टि के साथ साथ रंगों में बदलाव भी हो सकता है। जैसे: लैटानोप्रोस्ट और बिमाटोप्रोस्ट।

हाइपरोमोमोटिक एजेंट – आम तौर पर इन दवाओं को गंभीर या ज्यादा आईओपी वाले लोगों को दिया जाता है और ग्लूकोमा को स्थायी बनने से पहले इसे कम किया जाना चाहिए। यह आमतौर पर केवल आपातकालीन मामलों में ही दिया जाता है। इसमें हाइपरोमोमोटिक एजेंट मौखिक ग्लिसरीन और आइसोसोर्बाइड मौखिक रूप से और मनीटोल और यूरिया अनैतिक रूप से होते हैं।

सर्जरी – जब दवाएं ग्लूकोमा का इलाज करने में सक्षम नहीं होती या गंभीर साइड इफेक्ट्स दिखाती हैं, तो रौशनी बचाने के लिए सर्जरी की भी जरूरत होती है। ग्लूकोमा के लिए नियोजित विभिन्न सर्जिकल तकनीकें हैं, जैसे:

लेजर सर्जरी – यह ग्लूकोमा सर्जरी का सबसे लोकप्रिय और आसान तरीका है। लेजर सर्जरी पारंपरिक दवाओं और वर्तमान दवाओं के बीच की एक प्रक्रिया है। इस सर्जरी के दौरान, रोगी की आंख में ऑय ड्रॉप्स का उपयोग करके सुन्न किया जाता है और डॉक्टर के पास आंखों के लिए एक विशेष लेंस होता है। फिर आंखों पर लेजर का एक बड़ा बीम लगाया जाता है। ग्लूकोमा के लिए उपयोग की जाने वाली विभिन्न प्रकार की लेजर सर्जरी है।

आर्गन लेजर ट्रेबेकुलोप्लास्टी (एएलटी) – एएलटी ज्यादातर प्राथमिक ओपन-एंगल ग्लूकोमा (पीओएजी) के लिए उपयोग किया जाता है। इसमें तरल पदार्थ को ठीक से निकालने में मदद करते हुए आंखों के जल निकासी के चैनलों को खोलने के लिए लेजर बीम का उपयोग किया जाता है। कभी-कभी इस उपचार के साथ दवाओं की भी जरूरत होती है।

सेलेक्टिव लेजर ट्रेबेकुलोप्लास्टी (एसएलटी) – विशेष कोशिकाओं के इलाज के लिए बहुत कम स्तर के लेजर का उपयोग किया जाता है| इसका ज्यादातर प्राथमिक ओपन एंगल ग्लूकोमा (पीओएजी) के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है। इसे ऑय ड्रॉप्स और एएलटी के असफल उपचार के बाद वैकल्पिक तरीके के रूप में प्राथमिकता दी जाती है।

लेजर पेरिफेरल इरिडोटॉमी (एलपीआई) – एलपीआई ज्यादातर नैरो एंगल ग्लूकोमा के लिए ही है। इस मामले में, कॉर्निया और आईरिस के बीच का एंगल बहुत छोटा होता है और इसलिए यह द्रव चैनल में अवरोध का कारण बनता है। एलपीआई आईरिस में एक छोटा छेद बनाता है और तरल पदार्थ आउटलेट की मदद के लिए निकलने वाले चैनल को वापस कर देता है।

साइकलोबलेशन – इस प्रक्रिया में द्रव के उत्पादन को कम करने के लिए सिलीरी शरीर का एक हिस्सा नष्ट कर दिया जाता है जिससे आईओपी कम हो जाता है।

ट्राबेकुलेक्टोमी – इस विधि में अतिरिक्त तरल पदार्थ निकालने के लिए स्क्लेरा पर एक फ्लैप बनाया जाता है। इस प्रक्रिया से ऑयबॉल को फुलाया नहीं जाता| एक छोटा सा बुलबुला बनता है जो आंख के द्रव के निकलने की ओर इशारा करता है।

ग्लूकोमा – जीवन शैली के टिप्स

सामान्य जीवनशैली के टिप्स में निम्न हो सकते हैं:

  • रोजाना नियमित शारीरिक व्यायाम करना
  • मारिजुआना – मारिजुआना आंखों के दबाव को कम कर सकता है। लेकिन इतनी छोटी अवधि (3-4 घंटे), साइड इफेक्ट्स और साक्ष्य की कमी के कारण यह ग्लूकोमा के पाठ्यक्रम को बदल देता है इसलिए ग्लूकोमा के इलाज़ के लिए इसकी सलाह नहीं दी जाती|
  • शराब – यह कम समय के लिए आंखों के दबाव को कम करता है लेकिन कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि दैनिक रूप से शराब लेने से आंखों के ऊंचे दबाव से जुड़ी होती है। शराब का उपयोग ग्लूकोमा के विकास के खतरे को बदलने के लिए प्रकट नहीं होता|
  • सिगरेट – अध्ययन से पता चलता है कि सिगरेट पीने से ग्लूकोमा का खतरा बढ़ जाता है और इसका आंखों के स्वास्थ्य पर नेगेटिव प्रभाव पड़ता है।
  • कैफीन – कॉफी पीने से थोड़े समय के लिए आंखों का दबाव बढ़ जाता है। एक छोटी सी कॉफी ठीक है लेकिन ज्यादा कैफीन का सेवन ठीक नहीं है। एक अध्ययन में पता चला है कि 5 या अधिक कप कैफीनयुक्त कॉफी पीने से ग्लूकोमा विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है|

ग्लूकोमा वाले व्यक्ति के लिए क्या व्यायाम हैं?

व्यायाम – एरोबिक व्यायाम आंखों के कम दबाव में मदद करता है लेकिन ग्लूकोमा रोगियों में इसके अध्ययन नहीं हुए इसका प्राथमिक चिकित्सक से इलाज़ होना चाहिए। वेटलिफ्टिंग से भी आंखों पर दबाव बढ़ सकता है  खासकर यदि सांस रुक रही हो तो लेकिन यह भी व्यायाम का ही एक रूप भी है|

ग्लूकोमा के लिए सबसे अच्छा विटामिन क्या है?

आपके आहार में किसी भी विशेष पोषण संबंधी कमी को पूरा करने वाले को पूरक कहा जाता  है जिसमें विटामिन ए, बी-कॉम्प्लेक्स, सी और ई के साथ-साथ खनिजों, मैग्नीशियम, कैल्शियम और जिंक होते हैं। लेकिन इसके लिए कोई ठोस डेटा नहीं है कि विटामिन की खुराक ग्लूकोमा को रोकने में मदद करती है।

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