प्राचीन कुरुक्षेत्र की खोज: जानने और खोजने के लिए चीजें 7 प्रमुख स्थान (Kurukshetra Best Places in Hindi)

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कुरुक्षेत्र के बारे में

ऐसा माना जाता है कि कुरुक्षेत्र का अस्तित्व प्राचीन हड़प्पा सभ्यता से भी पहले का था| इस जगह को पवित्र स्थान माने की वजह एक व्यापक धारणा है कि कुरुक्षेत्र में ही भगवान कृष्ण ने अर्जुन को पवित्र भगवद् गीता का संदेश दिया था|

पूर्व में इसका नाम ‘थानेसर’ या स्थानेश्वर भी था| कुरुक्षेत्र वैदिक काल से ही शिक्षा का स्थान रहा था। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, कुरुक्षेत्र कितनी ही हिंदू संरचनाओं और ऋग्वेद के निर्माण के लिए पुराना शिक्षा केंद्र था|

स्थान: हरियाणा,

क्यों जाएँ: विरासत, इतिहास, पवित्रता के लिए

आदर्श: धार्मिक यात्राएं, मध्ययुगीन वास्तुकला देखने

सामन्य ज्ञान: कुरुक्षेत्र को “भगवद गीता की भूमि” कहा जाता है|

कुरुक्षेत्र में जाने के लिए स्थान

इतिहासकारों के अनुसार यह स्थान धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व की कई जगहों से भरा हुआ है। यहाँ उन यात्रियों की एक सूची दी गई है जहां प्रत्येक यात्री को जाना चाहिए:

7. ब्रह्मसरोवर

यह एशिया का सबसे बड़ा मानव निर्मित नहाने का टैंक है। भगवान शिव को समर्पित इस धर्मसरोवर को बादशाह अकबर के इतिहासकार अबुल फजल ने इसको ‘मनुष्य द्वारा निर्मित छोटा समुद्र’ की संज्ञा दी थी| सूर्य ग्रहण के दौरान तीर्थयात्री इस टैंक में दुबकी लगाते हैं क्योंकि इसके पानी में डुबकी लगाना अश्वमेध यज्ञ आयोजित करने के बराबर होता है।

टैंक के केंद्र में स्थित पुरुषोत्तम बाग में दुनिया का सबसे बड़ा कांस्य रथ है| इस सरोवर पर  गीता जयंती का त्यौहार उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस जगह के पास में ही बाबा नाथ मंदिर और बिड़ला गीता मंदिर स्थित है जो इस जगह के मुख्य आकर्षण हैं। यह जगह सर्दियों के दौरान प्रवासी पक्षियों का आश्रय बन जाती है जोकि देखने में बहुत सुंदर लगती है|

शहर से दूरी: 9 कि.मी

समय: 1-2 घंटे

आदर्श: धार्मिक लोग, इतिहासकार

यात्रा करने का सबसे अच्छा समय: नवंबर-दिसंबर

स्थान: नेविगेट करें

6. ज्योतिसार

यह स्थान इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यहीं पर भगवान कृष्ण ने अर्जुन को भगवद् गीता का उपदेश देकर कौरवों के विरुद्ध महाभारत का युद्ध लड़ने के लिए तैयार किया था। यहाँ एक बरगद का पेड़ भी है जिसके बारे में कहा जाता है कि इसका जिक्र  गीता की शिक्षाओं में भी  है। कृष्णा की एक मूर्ति एक संगमरमर के रथ के ऊपर इस बरगद के पेड़ के नीचे रखी गयी है जो यहाँ का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है।

शहर से दूरी: 12 कि.मी

समय: 1-2 घंटे

आदर्श: धार्मिक लोग | इतिहासकार | भगवान कृष्ण अनुयायियों

यात्रा करने का सबसे अच्छा समय: पूरे वर्ष

स्थान: नेविगेट करें

5. कृष्णा संग्रहालय

1987 में स्थापित हुए इस संग्रहालय में कृष्ण और उनके विभिन्न रूपों की कई कलाकृतियां हैं। संग्रहालय में मौजूद छह दीर्घाएं भागवत पुराण और महाभारत में बताये गये कृष्ण के अवतारों को दर्शाती हैं। दीर्घाओं में कलाकृतियों में विशेष चित्र, मूर्तियां और अन्य पुरातात्विक कलाकृतियों का प्रदर्शन होता है जो कि बस उत्कृष्ट हैं।

शहर से दूरी: 9 कि.मी

आदर्श: धार्मिक लोग, इतिहासकार, भगवान कृष्ण के अनुयायी

यात्रा करने का सबसे अच्छा समय: पूरे वर्ष

स्थान: नेविगेट करें

और पढो: चंडीगढ़|शिमला

कुरुक्षेत्र में जाने के लिए मंदिर

4. स्थानेश्वर महादेव मंदिर

एक धारणा के अनुसार इस मंदिर में पांडवों ने शिव से आशीर्वाद प्राप्त किया था| इस मंदिर के  टैंक में उपचार के लिए औषधीय गुण भी हैं, ऐसा माना जाता है कि इसी पानी से बनसुरा का  कुष्ठ रोग ठीक हुआ था| इस मंदिर में शिव लिंग की एक बहुत पुरानी मूर्ति है जोकि माना जाता है कि भगवान शिव की यह सबसे बड़ी मूर्ति है|

शहर से दूरी: 8 कि.मी

आदर्श: धार्मिक लोग, भगवान शिव के उपासक

यात्रा करने का सबसे अच्छा समय: पूरे वर्ष दौर

स्थान: नेविगेट करें

3. भद्रकाली मंदिर

यह मंदिर इसलिए महत्त्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि लोगों का मानना है कि इस जगह पर पांडव  महाभारत की लड़ाई से पहले प्रार्थना करने आये थे| एक शक्ति पीठ के रूप में यह मंदिर देवी काली और उनके कई रूपों का निवास स्थान है।

शहर से दूरी: 8 कि.मी

आदर्श: धार्मिक लोग, भगवान शिव के उपासक

यात्रा करने का सबसे अच्छा समय: पूरे वर्ष

स्थान: नेविगेट करें

2. सन्निहित सरोवर

इस सरोवर को भगवान विष्णु का निवास स्थान कहा जाता है और यहाँ आकर सरस्वती नदी की सभी सात शाखाएं मिलती हैं। ऐसा माना जाता है कि ग्रहण के समय इस सरोवर के पानी में डुबकी लगाने से अश्वमेध यज्ञ से प्राप्त होने वाले फल के समान सौभाग्य मिलता है।

शहर से दूरी: 9 कि.मी

आदर्श: धार्मिक लोग, भगवान विष्णु के उपासक

यात्रा करने का सबसे अच्छा समय: ग्रहण के समय

स्थान: नेविगेट करें

1. कुरुक्षेत्र पैनोरमा और विज्ञान केंद्र

यह जगह प्रयत्न का मुख्य आकर्षण होने के साथ-साथ महाकाव्य महाभारत और विज्ञान के विभिन्न रहस्यों का भी विस्तार से विवरण देता है। इसकी दो मंजिला इमारत में आपको प्रौद्योगिकी, संस्कृति और वैज्ञानिक ज्ञान से जुडी हुई भारत की खुशहाल विरासत का पता लगाने का मौका मिलता है। इस संग्रहालय में कुरुक्षेत्र के युद्ध के दृश्य सजीव रूप में दिखाई देते हैं साथ ही यह एक विज्ञान संग्रहालय भी है।

शहर से दूरी: 1.5 कि.मी

आदर्श: हर कोई

यात्रा करने का सबसे अच्छा समय: पूरे वर्ष

स्थान: नेविगेट करें

कुरुक्षेत्र में क्या करें:

ऐतिहासिक भव्यता के इलावा कुरुक्षेत्र हथकरघा और मिट्टी के बर्तनों के लिए भी प्रसिद्ध है। इस शहर में सारंगों, वस्त्रों, शॉल के साथ-साथ कढ़ाई वाले कपड़े भी खरीदे जा सकते हैं| कुरुक्षेत्र की फुल्कारी की बुनाई शैली की मांग आज भी देश भर में रहती है|

कुरुक्षेत्र कैसे पहुंचे

निकटतम हवाई अड्डा:

दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (179 कि.मी)

अपनी उड़ानें बुक करके पैसे पैसे बचाएं: क्लियरट्रिप फ्लाइट कूपन, मेक माय ट्रिप  उड़ान कूपन, मुसाफिर फ्लाइट कूपन

निकटतम रेलवे स्टेशन:

कुरुक्षेत्र जंक्शन रेलवे स्टेशन (मुख्य शहर से 2 कि.मी)

निकटतम बस स्टॉप:

यूपी, पंजाब और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के आसपास के शहरों वाली स्थानीय बस सेवाएं

अपनी बस टिकट बुक करके पैसा बचाएंगोआईबीबो बस प्रोमो कोड, मेकमायट्रिप  बस

कुरुक्षेत्र में कहाँ रहें

होटल केसर,  होटल पर्ल मार्क, मोटल गोल्डन सरस, होटल किमाया

होटल बुकिंग पर छूट पायें: ओयो रूम्स ऑफर, रेडबस होटल ऑफर

यात्रा के लिए आसपास के स्थान

  • शेख चिली का मकबरा (6.7 कि.मी)
  • श्रीकृष्ण संग्रहालय (6 कि.मी)
  • सरस्वती वन्यजीव अभयारण्य (40 कि.मी)
  • छिछिला वन्यजीव अभयारण्य (20 कि.मी)
  • सेंट पॉल चर्च (53 कि.मी)
  • कर्ण झील (36 कि.मी)
  • रानी का तलाब (12 कि.मी)
  • भवानी अंबा मंदिर (57 कि.मी)

छिपे हुए रत्न

  • यदि आप इतिहास प्रेमी हैं तो आपको भीष्म कुंड नामक जल जलाशय जाना चाहिए जो पितामह भीष्म को समर्पित है|  माना जाता है कि इस जगह पर रखा गया है। महाभारत की लड़ाई में अर्जुन के साथ भयंकर मुठभेड़ के बाद जब वे गिरे तो तीर के बिस्तर पर वे इसी जगह लेटे थे|
  • अपनी यात्रा कार्यक्रम के दौरान आपको कोस मिनार भी जाना चाहिए जिसे ‘माइल पिलर भी कहते हैं| कोस मिनार मुगल सम्राटों द्वारा यात्रा और संचार उद्देश्यों के लिए बनाया गया था।
  • राजा हर्ष का टीला कुरुक्षेत्र से एक किलोमीटर की दूरी पर है| इसका पुरातात्विक महत्व भी है, यहाँ की खुदाई से पता चला कि 7वीं शताब्दी में राजा हर्षवर्धन इस क्षेत्र के शासक थे।

कैशकारो की सलाह

संग्रहालयों, जलाशयों और मंदिरों के इलावा आपको कुछ मजेदार समय बिताने के लिए पिपली चिड़ियाघर जाना चाहिए जोकि काले हिरन प्रजनन के लिए प्रसिद्ध है|

कुरुक्षेत्र शहर से लगभग 36 कि.मी दूर सुंदर और प्राचीन कर्ण झील का आनंद लीजिये|

यात्रा करने के लिए सबसे मजेदार तरीका

सदा द्वारा यात्रा करना एक मजेदार अनुभव होता है। आप राजमार्ग पर स्थानीय व्यंजनों का स्वाद ले सकते हैं|

यदि आप अपनी कार से नहीं जाना चाहते, तो आप कार किराए पर ले सकते हैं:

गेटमीकैब, सवारी

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