Lactose Intolerance In Hindi लैक्टोज इनटॉलेरेंस: लक्षण, कारण, डायगनोसिस और उपचार

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Lactose Intolerance In Hindi लैक्टोज इनटॉलेरेंस: लक्षण, कारण, डायगनोसिस और उपचार

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What is Lactose Intolerance In Hindi- लैक्टोज इनटॉलेरेंस क्या है?

लैक्टोज इनटॉलेरेंस वास्तव में एक ऐसी स्थिति है जहां शरीर डेयरी से बनी चीज़ों को स्वीकार नहीं करता। दूध से बनी चीज़ों को लेने से पेट में दर्द हो सकता है और पाचन संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।

लैक्टोज इनटॉलेरेंस आमतौर पर एक इलाज योग्य स्थिति नहीं है। लेकिन कुछ ऐसे तरीके हैं जो लैक्टोज इनटॉलेरेंस के लक्षणों को कम कर सकते हैं। लैक्टोज इनटॉलेरेंस दो प्रकार के हो सकते हैं अर्थात् प्राइमरी और सेकेंडरी|

लैक्टोज इनटॉलेरेंस का प्राथमिक प्रकार आमतौर पर मेडिटरेनियन या साउथ यूरोपियन के बीच देखा जाता है।

लैक्टोज इनटॉलेरेंस का सेकेंडरी प्रकार तब हो सकता है जब शरीर में कुछ चोट या सर्जरी या छोटी आंत की बीमारी के बाद लैक्टोज की मात्रा कम हो जाती है।

एक अन्य प्रकार का लैक्टोज इनटॉलेरेंस है जिसका नाम कॉनजेनिटल लैक्टोज इनटॉलेरेंस है। यह आमतौर पर लैक्टेज गतिविधि की अनुपस्थिति के कारण होता है।

How does Lactose Intolerance affect the body In Hindi- लैक्टोज इनटॉलेरेंस शरीर को कैसे प्रभावित करती है?

लैक्टोज इनटॉलेरेंस शरीर पर विभिन्न प्रभाव डाल सकती है। इसमें पेट में ऐंठन, मतली, उल्टी या अपच हो सकता है। यह डेयरी उत्पादों को खाने या पीने के बाद गैस बनने या सीने की जलन की भावना का कारण बन सकता है।

दूध के प्रोडक्ट्स को लेने के बाद लैक्टोज इनटॉलेरेंस की असुविधा की सामान्य भावना पैदा करने में सक्षम है।

What are the causes of Lactose Intolerance In Hindi – लैक्टोज इनटॉलेरेंस के कारण क्या हैं?

लैक्टोज इनटॉलेरेंस के निम्न कारण हो सकते हैं।

एंजाइम लैक्टेज के बनने में कमी हो सकती है| यह छोटी आंत में होता है। लैक्टेज एक ऐसा एंजाइम है जो लैक्टोज के पाचन में मदद करता है। लैक्टोज डेयरी प्रोडक्ट्स में पाया जाता है। लैक्टोज इनटॉलेरेंस उम्र के साथ बढ़ भी सकती है। आमतौर पर शिशुओं को दूध पचाने में कोई समस्या नहीं होती।

What are the risk factors of Lactose Intolerance In Hindi – लैक्टोज इनटॉलेरेंस के खतरे के लिए क्या कारक हैं?

लैक्टोज इनटॉलेरेंस से खतरे के लिए कारक निम्नलिखित हैं।

  • लैक्टोज इनटॉलेरेंस होने की संभावना रोगी की उम्र बढने के साथ ज्यादा होती है। यह विशिष्ट जातीय समूहों के भीतर भी हो सकता है।
  • लैक्टोज इनटॉलेरेंस छोटी आंत के विकार, सर्जरी या बीमारी के प्रभाव के बाद हो सकता है। कुछ कैंसर के इलाज़ भी लैक्टोज इनटॉलेरेंस के ज्यादा खतरे का कारण बन सकते हैं। अफ्रीका, एशिया और हिस्पैनिक आबादी में लैक्टोज इनटॉलेरेंस अधिक और समय से पहले पैदा होने वाले बच्चों में भी देखी जा सकती है।

What are the symptoms of being Lactose Intolerant in Hindi – लैक्टोज इनटॉलेरेंस के क्या लक्षण हैं?

  • ये लक्षण हैं जो रोगी को यह तय करने में मदद करते हैं कि आपको लैक्टोज इनटॉलेरेंस है या नहीं।
  • लैक्टोज इनटॉलेरेंस के सामान्य लक्षणों में डेयरी प्रोडक्ट्स को लेने के तुरंत बाद पेट में दर्द, मतली उल्टी और दस्त (मध्यम), सूजन और गैस का बनना, आदि शामिल हैं।
  • यदि पेट में दर्द बना रहता है तो अपने डॉक्टर से मिलें|

How is Lactose Intolerance Diagnosed in Hindi – लैक्टोज इनटॉलेरेंस का पता कैसे किया जाता है?

रोगियों में लैक्टोज इनटॉलेरेंस तय करने के लिए तरीके निम्न हैं।

लैक्टोज इनटॉलेरेंस को पहचानने के लिए एक से ज्यादा टेस्ट होते हैं। जैसे:

  • लैक्टोज इनटॉलेरेंस टेस्ट (दूध पीने के 2 घंटे बाद खून की निगरानी की जाती है)
  • हाइड्रोजन ब्रीद टेस्ट
  • स्टूल एसिडिटी टेस्ट।

लैक्टोज इनटॉलेरेंस के शारीरिक लक्षणों में दूध के प्रोडक्ट्स या लैक्टोज वाले प्रोडक्ट्स लेने के बाद असुविधा या मतली की भावना होती है|

What are the measures for prevention and control in Hindi – इससे रोकथाम और इसे कण्ट्रोल करने के लिए क्या उपाय हैं?

लैक्टोज इनटॉलेरेंस से रोकथाम और कण्ट्रोल करने के निम्न उपाय किए जाने चाहिए।

  • जितना हो सके दूध के प्रोडक्ट्स लेने से बचें।
  • अपने रोज़ के भोजन में बहुत कम मात्रा में डेयरी प्रोडक्ट्स शामिल करें।
  • आइसक्रीम ना खाने की सलाह दी जाती है। संतरे, ब्रोकोली या सोया का दूध और अंडे लेकर अच्छा पोषण बनाए रखें।
  • लैक्टेज एंजाइम की गोलियों या ड्रॉप्स का उपयोग किया जा सकता है।
  • लैक्टोज प्रोडक्ट्स के उपयोग में कटौती की जानी चाहिए।

What are the treatment options in Hindi – इसके इलाज़ के क्या आप्शन हैं?

लैक्टोज इनटॉलेरेंस के लक्षणों को कम करने के लिए कई तरह के इलाज़ के आप्शन हैं।

  • एलोपैथिक की कुछ दवाएं जैसे प्रोबायोटिक्स मिलते हैं। इन सप्लीमेंट या कैप्सूल में सक्रिय कल्चर मौजूद होते हैं। उन्हें दही में भी शामिल किया जा सकता है। यह बेहतर तरीके से लैक्टोज के पाचन में मदद करते हैं| यदि आपको नियमित असुविधा हो रही है तो डॉक्टर के पास जाएँ|
  • अन्य प्राकृतिक उपचारों में दूध के विकल्प के रूप में सोया दूध ले सकते हैं|

Lifestyle tips – Lactose Intolerance in Hindi – लाइफस्टाइल टिप्स – लैक्टोज इनटॉलेरेंस

लैक्टोज इनटॉलेरेंस वाले रोगियों के लाइफस्टाइल के लिए कुछ टिप्स हैं।

  • अपने खाने को ठीक से संतुलित करें। जितना हो सके दूध के प्रोडक्ट्स से बचें।
  • कम समय के अंतराल पर डेयरी आइटम न लें।
  • यदि जरूरी हो तो बेहतर पाचन के लिए प्रोबायोटिक्स लें। यदि दूध लेने के बाद पेट में लगातार दर्द रहता है तो अपने डॉक्टर से सलाह करें।

What are the Recommended exercises in Hindi – इसके लिए कौन कौन से व्यायाम करने की सलाह दी जाती है?

लैक्टोज इनटॉलेरेंस के लिए कोई ख़ास व्यायाम नहीं हैं। लेकिन वैज्ञानिक खोज से साबित होता है कि एक निश्चित समय के लिए नियमित रूप से व्यायाम करने से पाचन को बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

इसलिए डॉक्टर पूरे दिन एक्टिव रहने और व्यायाम या योग के लिए कम से कम 30 मिनट की विशेष कसरत करने की सलाह देते हैं।

What are the interactions with diseases or pregnancy in Hindi – बीमारियों या गर्भावस्था के साथ इसका क्या इंटरेक्शन है?

ये बीमारियों और गर्भावस्था में इससे निम्न इंटरेक्शन हो सकते हैं:

गर्भावस्था: कई मामलों में गर्भावस्था के दौरान लैक्टोज इनटॉलेरेंस बढ़ सकती है। यह अन्य बीमारियों के साथ प्रतिक्रिया नहीं करता। माताओं के लिए विटामिन-डी की जरूरत होती है। लेकिन बच्चे के जन्म के समय के दौरान खोज से यह साबित होता है कि माता का शरीर सामान्य हो सकता है और लैक्टोज इनटॉलेरेंस समय के साथ दूर हो सकती है।

What are the common complications of being lactose intolerant in Hindi – लैक्टोज इनटॉलेरेंस से होने वाली सामान्य मुश्किलें क्या हैं?

लैक्टोज इनटॉलेरेंस से होने वाली सामान्य मुश्किलें निम्न हो सकती हैं।

  • डेयरी प्रोडक्ट्स की कमी से शरीर में कैल्शियम की कमी होती है। कैल्शियम की कमी से ऑस्टियोपोरोसिस एक्सट्रा जैसे हड्डी के कई विकार हो सकते हैं।
  • ऑस्टियोपीनिया का खतरा बढ़ जाता है।
  • कुपोषण से पीड़ित होने की संभावना भी होती है।

Frequently asked questions – सामान्य प्रश्न

क्या  बच्चों में लैक्टोज इनटॉलेरेंस का खतरा ज्यादा होता है?

दरअसल वयस्कों में लैक्टोज इनटॉलेरेंस का खतरा ज्यादा होता है। लेकिन बच्चों को आमतौर पर लैक्टोज से कोई समस्या नहीं होती। इसलिए वे दूध को बहुत आसानी से पचा सकते हैं।

लैक्टोज में छिपे हुए भोजन के स्त्रोत क्या हैं?

लैक्टोज न केवल दूध प्रोडक्ट्स में मौजूद हो सकता है, बल्कि यह रोटी और बेक की हुई चीज़ों में भी मौजूद हो सकता है।

क्या लैक्टोस केवल डेयरी प्रोडक्ट्स में होता है?

नहीं, यह अन्य संसाधनों से भी आ सकता है जैसे कि तैयार या प्रोसेस्ड भोजन।

यदि हम लैक्टोज इनटॉलेरेंस को अनदेखा करते हैं तो क्या होता है?

इससे डायरिया हो सकता है। यह असुविधा और अप्रिय प्रभावों की सामान्य भावना पैदा कर सकता है।

क्या लैक्टोज इनटॉलेरेंस से किसी के मरने की संभावना है?

लैक्टोज से एलर्जी से गंभीर रूप से प्रभावित रोगियों में लैक्टोज इनटॉलेरेंस शरीर में गंभीर एनाफिलेक्टिक शॉक पैदा कर सकता है जो एनाफिलेक्सिस का कारण बन सकती है। यह खतरनाक हो सकता है और इससे रोगी की मृत्यु भी हो सकती है।

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