मलेरिया (Malaria in Hindi): लक्षण, कारण, निदान और उपचार

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Malaria in Hindi

मलेरिया मच्छर से पैदा होने वाली एक इन्फेक्शिअस बीमारी है जो प्लास्डियम समूह से संबंधित एकल-कोशिका सूक्ष्मजीवों के परजीवी के कारण होती है। यह मनुष्यों और जानवरों दोनों को ही प्रभावित करती है। यह संक्रमित मच्छर के काटने के 10 से 15 दिनों बाद इसके लक्षण दिखाई देते हैं| आमतौर पर इसमें बुखार, थकावट, उल्टी और सिरदर्द होता है। यदि इसका पहले ही ठीक से इलाज ना किया जाए तो यह दोबारा हो सकता है|

यह संक्रमित महिला एनोफिलीज़ मच्छर द्वारा फैलता है और इसके परजीवी मच्छर के लार से व्यक्ति के खून में प्रवेश कर जाते हैं जो बाद में लिवर में पहुंच जाते हैं जहां वे फिर से  उत्पादन करते हैं। प्लाज्मोडियम की 5 प्रजातियां हैं जो मनुष्यों को संक्रमित कर सकती हैं| पी. फाल्सीपेरम खतरनाक होता है क्योंकि पी. विवाक्स, पी. ओवेल और पी. मलेरिया इस का हल्का रूप हैं। मलेरिया को खून की जांच से पहचाना जाता है| इसे रोकने के लिए कई दवाएं मिलती हैं। वर्तमान में इसके लिए कोई प्रभावी टीका नहीं है लेकिन उसे विकसित करने की कोशिशें जरी हैं|

उप-सहारा अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका समेत ट्रॉपिकल क्षेत्रों में यह बीमारी फैली हुई  है। मलेरिया के लगभग 216 मिलियन मामलों की विश्व स्तर पर रिपोर्ट की गई है जिसके अनुसार यह अनुमान है कि 731,000 से 445,000 मौतें हुईं।

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मलेरिया शरीर को कैसे प्रभावित करती है?

संक्रमित मच्छर के काटने के बाद व्यक्ति को एक सप्ताह से एक महीने तक लक्षण नहीं दिखाई देते| इस समय के दौरान मलेरिया परजीवी खून के बहाव में लाल रक्त कोशिकाओं पर हमला करने से पहले व्यक्ति के लिवर में बढ़ते रहते हैं। ये परजीवी तब आर.बी.सी को एक विषाक्त पदार्थ हेमोज़ोइन जारी करते हैं जो ठंड और बुखार का कारण बनता है। जैसे-जैसे यह बढ़ता जाता है व्यक्ति की स्प्लीन और लिवर बड़ा होता जाता है जो बाद में एनीमिया या पीलिया का कारण बन सकता है। कुछ गंभीर मामलों में यह मस्तिष्क पर भी हमला करता है और न्यूरोलोजिकल समस्याएं पैदा करता है।

मलेरिया के कारण क्या हैं?

  • मलेरिया प्लाजामोडियम नामक एक परजीवी प्रोटोज़ोन के कारण होता है जो आमतौर पर मादा एनोफेल्स द्वारा फैलता है|
  • यह संक्रमित सिरिंजों का साझा उपयोग करके भी हो सकता है।
  • यदि अंग देने वाले को संक्रमण होता है तो ट्रांसप्लांट के दौरान भी कभी-कभी मलेरिया हो सकता है।
  • कभी-कभी खून का संक्रमण भी मलेरिया का कारण बन सकता है।
  • जन्म के दौरान संक्रमित मां से उसके बच्चे को मलेरिया हो सकता है।

मलेरिया के खतरे के कारक क्या हैं?

  • ट्रॉपिकल या सब-ट्रॉपिकल जगहों में रहना सबसे बड़ा खतरा है।
  • युवा बच्चों और शिशुओं के खतरे में भी बढ़ोतरी हुई है।
  • ट्रॉपिकल क्षेत्रों की यात्रा करते समय मलेरिया वाले इलाकों से आने वाले यात्रियों के खतरे में भी बढ़ोतरी हुई है।
  • गरीबी, ज्ञान की कमी और स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंच ना सकना भी एक कारक है।

मलेरिया के लक्षण क्या हैं?

मादा मच्छर द्वारा काटे जाने के बाद मलेरिया के लक्षण आमतौर पर एक हफ्ते या महीने में होते हैं। कभी-कभी परजीवी शरीर में एक तक निष्क्रिय रह सकते हैं|

  • बार बार होने वाला बुखार और सर्दी का अनुभव किया जा सकता है जो विषैले पदार्थों के कारण होता है जब परजीवी लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट कर देते हैं|
  • सर-दर्द
  • उल्टी
  • दस्त
  • शरीर-दर्द
  • पेट में दर्द
  • पसीना आना
  • मानसिक भ्रम की स्थिति
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मलेरिया का कैसे पहचाना जाता है?

खून की जांच – खून की जांच से परजीवी की उपस्थिति देखि जा सकती है और यह इस बात को तय करने में मदद करती है कि परजीवी किस प्रकार के मलेरिया के लक्षण पैदा कर रहे हैं| क्या संक्रमण कुछ दवाओं के प्रति परजीवी प्रतिरोध के कारण होता है और क्या यह बीमारी किसी भी महत्वपूर्ण अंग को प्रभावित कर रही है।

पीसीआर – यह जांच ये पता लगाने के लिए की जाती है कि परजीवी डीएनए विकसित हुआ है या नहीं, आमतौर पर इसकी लागत और कठिनाई के कारण इसका उपयोग नहीं किया जाता|

मलेरिया को कैसे रोकें और नियंत्रित करें?

मलेरिया का खतरा कम हो सकता है:

  • मच्छरदानी और मच्छरों से बचाने वाली क्रीम का उपयोग करना।
  • कीटनाशकों को छिडकाव|
  • खड़े पानी को निकालना|
  • पूर्ण आस्तीन वाली शर्ट और पैंट जैसे सुरक्षात्मक कपड़े पहनना।

मलेरिया का उपचार – एलोपैथिक उपचार

बीमारी की प्रकार और गंभीरता के आधार पर मलेरिया विरोधी दवाओं से इलाज किया जाता है:

  • एक्ट (आर्टेमिसिनिन-कॉम्बिनेशन-थेरेपी) – इसका उपयोग जटिल मलेरिया के इलाज के लिए किया जाता है जो किसी भी दवा के घटक के प्रतिरोध को कम करता है।
  • एमोडीकुईन
  • लुमेफेनट्रिन
  • मीफ्लोकुईन
  • सल्फाडोक्सिन
  • क्विनिन और क्लिंडामाइसिन – गर्भावस्था में मलेरिया के लिए इस संयोजन की दवा लेने की सलाह दी जाती है|
  • टेफेनोकुईन – यह विवाक्स मलेरिया की पुष्टि के बाद उसके वापिस लौटने को रोकता है।

मलेरिया का उपचार – होम्योपैथिक उपचार

चिनीनम सलफ्यूरिकम – यह सर्दी वाले बुखार के लिए बहुत प्रभावी है जो हर दिन 3 बजे होता है और गर्म कमरे में भी कंपकंपी होने लगती है।

बोलेटस और यूपेटोरियम पेरोफियाटियम – यह पसीने के साथ वाले मलेरिया के लिए सबसे प्रभावी दवा है। बोलेटस को गंभीर ठंड और बुखार के साथ विशेष रूप से रात में पसीने के लिए तय किया जाता है।

तेज़ बुखार वाले मलेरिया के लिए आर्सेनिक एल्बम लेने की सलाह दी जाती है।

जेल्समियम – यह बच्चों में उपयोग की जाती है| यह ऐसी सर्दी के लिए निर्धारित की जाती है जो पैरों से शुरू होकर पीठ की ओर होता है।

नाइट्रम मुरीएटिकम और पल्सेटिला सिरदर्द के साथ होने वाले मलेरिया के लिए है। नाइट्रम मुरीएटिकम का उपयोग सिरदर्द के साथ लगातार सर्दी लगने के मामले में किया जाता है, खासकर सुबह जागने पर। कुछ स्थानों में दर्द के साथ सर्दी के मामले में खासकर शाम को, पल्सेटिला सबसे अच्छी दवा है।

एपिस मेलिफ़िका – अचानक उल्टी के साथ सर्दी लगने पर यह दी जाती है।

फेरम आर्सेनिकम – यह दवा मलेरिया के अंतिम चरणों में दी जाती है जब लिवर और स्प्लीन बढ़ जाती है।

मलेरिया – जीवन शैली के टिप्स

  • सुरक्षात्मक कपड़े पहनें।
  • मच्छर प्रतिरोधी क्रीम लगायें|
  • खिड़कियों पर मच्छर वाली नेट और स्क्रीनिंग का प्रयोग करें।
  • कीटनाशकों का प्रयोग करें।

मलेरिया वाले व्यक्ति के लिए क्या व्यायाम हैं?

  • तेज चलना
  • योग
  • जॉगिंग

मलेरिया और गर्भावस्था – जानने योग्य बातें

  • गर्भवती महिलायें मलेरिया के लिए अतिसंवेदनशील हैं और उनमे गंभीर प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम का अधिक खतरा होता है|
  • फाल्सीपेरम से संक्रमित आरबीसी प्लेसेंटा में अलग हो जाते हैं और मां और भ्रूण के बीच पोषण संबंधी आदान-प्रदान में रूकावट डालते हैं|
  • विवाक्स से संक्रमण पी.फाल्सीपेरम वाले पुरानी एनीमिया और प्लेसेंटल मलेरिया संक्रमण का कारण बनता है जो जन्म से ही वजन को कम करता है और नवजात की मौत का खतरा बढ़ जाता है।
  • पहली गर्भावस्था में महिलाएं जन्म के समय वजन में दो-तिहाई की कमी का सामना कर सकती हैं|
  • गर्भावस्था में रुक-रुक कर निवारक उपचार मातृ और भ्रूण एनीमिया, अपरा पेरासाइटिमिया, जन्म के समय कम वजन और नवजात की मृत्यु दर कम कर देता है।
  • सभी गर्भवती महिलाओं को नियमित प्रसवपूर्व देखभाल के एक हिस्से के रूप में आयरन और फोलिक एसिड पूरक जरूर लेना चाहिए।

मलेरिया से संबंधित सामान्य परेशानियाँ

  • सेरेब्रल मलेरिया।
  • साँस लेने में तकलीफ।
  • अंगों की विफलता।
  • खून की कमी
  • ब्लड शुगर का कम स्तर

सामान्य प्रश्न

क्या मलेरिया एक संक्रामक बीमारी है?

नहीं, मलेरिया व्यक्ति से व्यक्ति में नहीं फैलता और यौन संचार से भी नहीं होता|

मलेरिया के दीर्घकालिक प्रभावों के बारे में क्या जाना जाता है जिनका प्रयोग आम तौर पर मलेरिया को रोकने और इलाज के लिए किया जाता है?

मलेरिया को रोकने और इलाज करने के लिए उपयोग की जाने वाली दवाओं को कम से कम 1 वर्ष या उससे अधिक के लिए अच्छी तरह से लिया जाता है।

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