मतली (Nausea in Hindi): लक्षण, कारण, निदान और उपचार

0
486
Nausea in Hindi

मतली अस्वस्थता और असुविधा की एक अप्रिय संवेदना है जिसे अक्सर उल्टी के के रूप में जाना जाता है। अस्वस्थता की यह भावना कुछ सेकंड से कुछ मिनट तक रह सकती है या लंबे समय तक चलती है। यदि लंबे समय तक यह ठीक ना हो तो यह गंभीर स्थिति का लक्षण हो सकती है|

इससे ऊपरी पेट, छाती और गले में अस्वस्थता महसूस होती है। दर्द की तरह मतली भी बार बार होती है जो अप्रियता का कारण बनती है|

चूंकि मतली कोई विशेष लक्षण नहीं है लेकिन यह मोशन सिकनेस की बीमारी, चक्कर आना, माइग्रेन, खून में शक्कर की कम मात्रा, गैस्ट्रोएंटेरिटिस या खाने में विषाक्तता के कारण हो सकती है। मतली गर्भावस्था के दौरान, कीमोथेरेपी, सुबह के समय और कई दवाओं के दुष्प्रभाव हैं। मतली चिंता, घृणा या डिप्रेशन के कारण भी हो सकती है।

मतली के लक्षणों को रोकने या कम करने के लिए एंटीमेटिक्स दिए जाते हैं।

और पढो: इंसोमेनिया in hindiइंसोमेनिया in hindi

मतली शरीर को कैसे प्रभावित करती है?

मतली तब होती हैं जब पेट में ठीक महसूस नहीं होता| उल्टी एक परछाई है जो दिमाग में उल्टी के केंद्र से पैदा होती है जो अपनी पेरिस्टाल्टिक अति की वजह से पेट की सामग्री को आंतों से मुंह द्वारा उलटने को मजबूर कर देती है|

मतली के कारण क्या हैं?

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संक्रमण – यह मतली के सबसे आम कारणों में से एक है और कई गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल विकारों की वजह से हो सकती है जैसे गैस्ट्रोसोफेजियल रीफ्लक्स, फंक्शनल डिस्प्सीसिया, गैस्ट्रोपेरिसिस, पेप्टिक अल्सर, सेलियाक रोग, एंटी-सेलियाक ग्लूटेन सेंसटिविटी या क्रॉन रोग ।

खाद्य विषाक्तता – यह प्रदूषित भोजन के बाद एक से छह घंटे में ही मतली और उल्टी अचानक शुरु हो जाती है और एक से दो दिनों तक चलती है।

दवाएं – ये भी मतली का कारण हो सकती है। कैंसर और अन्य बीमारियों के लिए साइटोटोक्सिक कीमोथेरेपी रेगिमेंस और सामान्य एनेस्थेटिक एजेंट मतली का कारण बनते हैं| इसके अलावा, कुछ रोगियों में मतली पैदा करने के लिए एर्गोगामाइन अच्छी तरह से जाना जाता है पहली बार इसका इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति को यदि जरूरत हो तो आराम के लिए एंटीमेटिक दिया जाता है|

गर्भावस्था – गर्भावस्था के दौरान यह आम है।

डिसेकुइलिब्रऍम – यह मोशन सिकनेस जैसे संतुलन से जुड़ी स्थितियों में मतली और उल्टी हो सकती है।

मनोवैज्ञानिक – मतली डिप्रेशन, चिंता और बार बार खाना खाने के विकार से भी हो सकती है।

जटिल बीमारियां – मतली के ज्यादातर कारण गंभीर नहीं हैं। लेकिन कुछ गंभीर स्थितियां मतली से जुड़ी होती हैं। इनमें पेनक्रियाटिटिस, छोटी अंत में रूकावट, एपेंडिसाइटिस, कॉल्सय्सटिटिस, हेपेटाइटिस, मधुमेह केटोएसिडोसिस, इंट्राक्रैनियल दबाव, मस्तिष्क ट्यूमर, मेनिंगजाइटिस, दिल का दौरा, कार्बन- मोनो-ऑक्साइड विषाक्तता और कई अन्य शामिल हैं।

मतली के खतरे क्या हैं?

इससे कोई विशेष खतरा नहीं है|

 और पढो: मेनिनजाइटिस in hindiएसोफेजियल मोटालिटी डिसऑर्डर in hindi

मतली के लक्षण क्या हैं?

  • मतली असहज करती है लेकिन दर्दनाक नहीं है| यह व्यक्ति को गले, छाती या ऊपरी पेट के पीछे महसूस होती है।
  • यह आमतौर पर भोजन के बेस्वाद होने या उल्टी से जुड़ी होती है। कभी-कभी मतली की वजह से पसीना होने लगता है।

मतली को कैसे पहचाना जाता है?

  • रोगी का इतिहास – यह मतली होने के कारण को जानने में मदद कर सकता है। यदि लक्षण तेज़ होते हैं तो दवाएं, विषाक्त पदार्थ और संक्रमण की संभावना होती है। जबकि मतली का एक लंबा इतिहास पुरानी बीमारी की ओर इशारा करता है|
  • शारीरिक परीक्षा – पेट में जोर की ठनकने वाली आवाज़ आती है जो आँतों में होने वाली रूकावट की ओर इशारा करती है जबकि छिडकने जैसी आवाज़ गैस्ट्रिक आउटलेट में रूकावट की ओर संकेत करती है| पेट की परीक्षा करने के लिए दबाते समय दर्द, सूजन का भी संकेत मिलता है।
  • लिवर फ़ंक्शन टेस्ट और लिपेज – इस जांच से अग्नाशयी रोगों की पहचान होती है|
  • एक्स-रे – यह पेट में तरल वायु के स्तर को दिखाता है जो आँतों की रूकावट का संकेत है|
  • एडवांस इमेजिंग – सीटी स्कैन, एंडोस्कोपी, कॉलोनोस्कोपी, बेरियम एनीमा या एमआरआई जैसे एडवांस इमेजिंग भी इसे पहचानने में मदद करते हैं|

मतली को कैसे रोकें और नियंत्रित करें?

  • मतली को शुरुआत में ही रोकने में मदद मिल सकती है। झिलमिलाहट वाली रोशनी से बचें (जो माइग्रेन वाले सिरदर्द को ट्रिगर करती है), गर्मी और नमी, समुद्री यात्रा, तेज़ गंध से बचने से मतली से बचने में मदद मिल सकती है।
  • यात्रा से पहले मतली की दवा लेने से मोशन सिकनेस को रोका जा सकता है।
  • छोटे अंतराल में और लगातार भोजन खाने से मतली के लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है।
  • भोजन के बाद शारीरिक गतिविधि से बचक्र मतली को कम किया जा सकता है।
  • मसालेदार, उच्च वसा वाला या चिकना खाना खाने से बचकर मतली से बच सकते हैं।

मतली का उपचार – एलोपैथिक उपचार

जब उल्टी के कारण तरल पदार्थों का नुकसान हो तो ओरल इलेक्ट्रोलाइट सलूशन से हाइड्रेट रहें। कुछ मामलों में रीहाइड्रेशन अनियंत्रित होता है।

मतली का इलाज करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं:

  • एंटीहिस्टामाइन्स और एंटीकॉलिनर्जिक्स (मेक्लिज़िन और स्कोप्लामाइन) – यह मोशन सिकनेस वाले लोगों को दी जाती है।
  • डोपामाइन एन्टागोनिस्टस (मेटोक्लोपामाइड, प्रोक्लोरपेरिजिन, और क्लोरप्रोमेज़िन) – यह माइग्रेन वाले सिरदर्द से जुड़ी मतली और उल्टी के लिए है।
  • सेरोटोनिन विरोधी (ऑनडेंसट्रॉन) – यह दवा गैस्ट्रोएंटेरिटिस की वजह से होने वाली मतली और उल्टी को दबा देती है।
  • प्रोडोक्सिन और डोक्सीलामाईन – यह दवा गर्भावस्था के कारण होने वाली मतली और उल्टी के इलाज्ज़ के लिए है।
  • डीमेनहाईडरीनेट – यह दवा पोस्टोपराटिव मतली और उल्टी को रोकने में मदद करता है।

मतली का उपचार – होम्योपैथिक उपचार

  • नक्स वोमिका – यह बदहजमी की वजह से होने वाली मतली और ऐंठन से राहत दिलाता है।
  • ब्रायनिया – यह दवा तब दी जाती है जब पेट खाने के बाद भारी महसूस होता है|
  • एंटीमोनियम क्रूडम – यह तब दिया जाता है जब खाने या पीने के बाद उल्टी हो जाती है|
  • इपेकाक – यह लगातार होने वाली मतली का इलाज करने के लिए है जो आम तौर पर उल्टी के साथ होती है।

मतली – जीवन शैली के टिप्स

  • दिन भर थोडा थोडा भोजन खाएं|
  • उन खाने वाली चीज़ों से बचें जो पचाने में सख्त हैं।
  • यदि गर्म भोजन की गंध से मतली होती है तो ठंडी चीज़ें ना खाएं|
  • बहुत सारा तरल पदार्थ पीएं| भोजन के बाद पीने की बजाय भोजन के बीच में पियें|
  • अदरक या कैमोमाइल चाय जैसे पेय पदार्थ पियें|
  • कोला, कॉफी और चाय जैसे कैफीनयुक्त पेय लेने से बचें।
  • मसालेदार और तले हुए भोजन से बचें।

मतली वाले व्यक्ति के लिए क्या व्यायाम हैं?

उल्टी महसूस होने पर गहरी सांस लेने का अभ्यास करें|

मतली और गर्भावस्था – जानने योग्य बातें

  • गर्भावस्था में उल्टी के बाद मतली हार्मोन, इवोलूशनरी एडाप्टेशन या मनोवैज्ञानिक कारणों से हो सकती है।
  • एक अध्ययन के अनुसार गर्भावस्था की पहली तिमाही के दौरान मतली होने से गर्भपात का खतरा कम हो जाता है।
  • हालांकि हर गर्भवती महिला को गर्भावस्था के दौरान परेशानी नहीं होती ज्यादातर मतली दूसरी और तीसरी तिमाही में भी अनुभव की जा सकती है।

मतली से संबंधित सामान्य परेशानियाँ

अधिकतर मतली अपने आप ही ठीक हो जाती है। लेकिन लगातार होने वाली मतली और उल्टी डी-हाइड्रेशन और कुपोषण का कारण बन सकती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

four × 2 =