मोटापा (Obesity in Hindi): लक्षण, कारण, निदान और उपचार

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Obesity in Hindi

मोटापा एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की अतिरिक्त वसा इस हद तक जमा हो जाती है कि इसका स्वास्थ्य पर नेगटिव प्रभाव हो सकता है। लोगों को मोटा तब माना जाता है, जब उनके शरीर का द्रव्यमान सूचकांक (व्यक्ति की ऊंचाई के वर्ग द्वारा किसी व्यक्ति के वजन को विभाजित करके प्राप्त माप) 30 कि./2 से अधिक होता है, जिसमें 25-30 कि./ 2 से अधिक वजन के रूप में परिभाषित किया जाता है। मोटापा कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों, टाइप-2 मधुमेह और स्लीप एपने, कुछ प्रकार के कैंसर, ऑस्टियोआर्थराइटिस और डिप्रेशन होने की संभावना को बढ़ाता है।

मोटापा वयस्कों और बच्चों में बढ़ती दरों के साथ विश्व स्तर पर मौत की प्रमुख रोकथाम का कारण भी है। भारत में हर साल मोटापे से 10 मिलियन से ज्यादा मामलों की सूचना मिली है। 2015 में 195 देशों में 600 मिलियन वयस्क और 100 मिलियन बच्चे मोटापे से ग्रस्त थे। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में मोटापा ज्यादा आम है| मोटापे को 21वीं शताब्दी की सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याओं में से एक भी माना जाता है।

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मोटापा शरीर को कैसे प्रभावित करता है?

शरीर में फैट सेल्स साइटोकिन्स नाम के सूजन वाले अणु बनाते हैं जो अन्य सभी सेल्स और टिश्यूओं में सूजन पैदा करते हैं। मस्तिष्क में सूजन यादाश्त को प्रभावित करती है और अल्जाइमर के खतरे को बढ़ा सकती है। सूजन की वजह से ब्लड शुगर प्रणाली प्रभावित होती है| इस प्रकार, मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है और खून की नलियां और कोलेस्ट्रॉल प्रभावित होते हैं जिससे  एथेरोस्क्लेरोसिस और कार्डियोवैस्कुलर बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।

मोटापे के कारण क्या हैं?

जेनेटिक्स – शरीर के वजन पर जेनेटिक, व्यवहारिक और हार्मोनल प्रभाव मोटापे का कारण बन सकते हैं।

अस्वास्थ्यकर आहार – यदि आप व्यायाम और सामान्य दैनिक गतिविधियों के द्वारा जलाए जाने वाली कैलोरी से ज्यादा कैलोरी लेते हैं तो आपका शरीर इस अतिरिक्त कैलोरी को वसा के रूप में इकठा करता है और मोटापे का कारण बनता है।

चिकित्सा परिस्थितियां – दुर्लभ लेकिन चिकित्सीय स्थितियां जैसे प्रैडर-विली सिंड्रोम, कुशिंग सिंड्रोम और अन्य बीमारियां मोटापे का कारण बन सकती हैं।

मोटापे के खतरे के कारक क्या हैं?

जेनेटिक्स – जेनेटिक्स यह भूमिका निभाते हैं कि शरीर कितनी कुशलता से भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करता है और व्यायाम के दौरान शरीर कितनी कैलोरी जलाता है।

पारिवारिक इतिहास – यदि माता-पिता में से कोई भी मोटा है तो बच्चों में भी मोटापे का खतरा बढ़ जाता है।

निष्क्रियता(इनएक्टिविटी) – व्यायाम हर रोज़ कैलोरी को जलाता है| इसलिए व्यायाम ना करने  से कैलोरी और जुड़ सकती है। कभी-कभी गठिया जैसी चिकित्सा समस्याएं घटती हुई गतिविधि का कारण बनती हैं, जिससे वजन बढ़ने में योगदान मिलता है।

अस्वास्थ्यकर आहार – उच्च कैलोरी का आहार, फास्ट फूड, भोजन में फल और सब्जियों की कमी वजन बढ़ाने में योगदान देते हैं|

चिकित्सा समस्याएं – मोटापा चिकित्सा स्थितियों जैसे प्रैडर-विली-सिंड्रोम, कुशिंग-सिंड्रोम और अन्य कई कारणों से हो सकता है।

कुछ दवाएं – एंटी-ड्रिप्रेसेंट्स, एंटी-सीज़र दवाएं, मधुमेह की दवाएं, एंटी-साइकोटिक दवाएं, स्टेरॉयड और बीटा ब्लॉकर्स जैसी कुछ दवाएं वजन बढ़ा सकती हैं।

आयु – बढ़ती हुई उम्र के साथ-साथ हार्मोनल-परिवर्तन, मांसपेशियों की कठोरता और कम सक्रिय जीवनशैली मोटापे के खतरे को बढ़ाती है।

गर्भावस्था – गर्भावस्था के दौरान वजन बढ़ाना महिलाओं में मोटापे के विकास में योगदान दे सकता है।

धूम्रपान छोड़ना – धूम्रपान छोड़ना अक्सर वजन बढ़ाने से संबंधित होता है, कभी-कभी मोटापे का कारण भी वजन बढ़ना होता है। लेकिन धूम्रपान छोड़ने के स्वास्थ्य के लिए कई लाभ हैं|

नींद की कमी – नींद की कमी या बहुत अधिक नींद आना हार्मोन में बदलाव कर सकती है जिससे भूख बढ़ती है, इस वजह से आपको कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर भोजन की इच्छा होती है, जो वजन बढ़ाने में योगदान दे सकती है।

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मोटापे के लक्षण क्या हैं?

यदि किसी व्यक्ति का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 25 या उससे ज्यादा है तो व्यक्ति मोटापे से ग्रस्त है। बीएमआई को नापने के अलावा मोटापे के लक्षण जानने का और कोई तरीका नहीं हैं।

मोटापे की पहचान कैसे की जाती है?

शारीरिक परीक्षा – ऊंचाई नापना, महत्वपूर्ण संकेतों की जांच करना जैसे दिल की दर, रक्तचाप, और तापमान, दिल, फेफड़ों और पेट की जांच करने से समस्या की पहचान करने में मदद मिल सकती है।

बीएमआई की गणना – मोटापे के स्तर को तय करने के लिए बीएमआई जरूरी है।

कमर की परिधि नापना – कमर के चारों ओर का फैट जिसे आंतों की वसा या पेट की वसा कहा जाता है, इससे मधुमेह और हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है। 35 इंच से अधिक की कमर के नाप वाली महिलाएं और 40 इंच से अधिक की कमर की नाप वाले पुरुषों में स्वास्थ्य का खतरा हो सकता है।

अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की जांच – कभी-कभी कुछ चिकित्सीय स्थितियां मोटापे का कारण होती हैं जिससे इनके कारण जानने में मदद मिलती है|

खून की जांच – इस परीक्षण में कोलेस्ट्रॉल का परीक्षण, लिवर के काम की जांच, फास्टिंग  ग्लूकोज, थायराइड की जांच और अन्य भी हो सकते हैं।

मोटापे को कैसे रोकें और नियंत्रित करें?

नियमित रूप से व्यायाम करें – वजन बढ़ाने से रोकने के लिए हर हफ्ते 150 से 300 मिनट मध्यम या तेज़ गतिविधि से व्यायाम करें।

स्वस्थ आहार योजना का पालन करें – अपने आहार में फल, सब्जियां और साबुत अनाज जैसे कम कैलोरी वाले पोषक-तत्व से युक्त खाद्य पदार्थ जोड़ें और सेचुरेटेड फैट से बचें और मिठाई और शराब का सीमित उपयोग करें|

वजन की निगरानी – हर हफ्ते या महीने में वजन की निगरानी करने से बड़ी समस्याओं के छोटी  बनने में मदद मिल सकती है।

अविरोधी रहें – हफ्ते के दौरान सप्ताह के अंत में  और छुट्टियों के बीच जितनी ज्यादा हो सके उतने लम्बे समय तक स्वस्थ वजन की योजना का पालन करना चाहिए|

मोटापे का उपचार – एलोपैथिक उपचार

वजन घटाने सर्जरी की मदद ली जा सकती है इसमें निम्न हो सकते हैं:

गैस्ट्रिक बाईपास सर्जरी – गैस्ट्रिक बाईपास में, सर्जन पेट के ऊपर पर एक छोटी सी थैली बनाता है। तब छोटी आंत को थोड़ी दूरी में काटा जाता है और नयी थैली से जोड़ देता है जिससे तरल का बहाव सीधे पेट से निकलता है।

लैप्रोस्कोपिक एडजस्टेबल गैस्ट्रिक बैंडिंग (एलएजीबी) – इस प्रक्रिया में पेट को एक हवा भरे हुए  बैंड के साथ दो थैलियों में बाँट दिया जाता है। फिर बेल्ट की तरह बैंड को कसकर खींचकर, सर्जन दो पाउच के बीच एक छोटा सा चैनल बनाता है जो खोलने से खुलता है और आम तौर पर स्थायी रूप से रहने के लिए डिज़ाइन किया जाता है।

सर्जरी के अलावा शुरूआती इलाज़ आमतौर पर मामूली वजन घटाने के लिए होता है जिसे आहार में जरूरी बदलाव करके और हर हफ्ते नियमित रूप से 200 मिनट व्यायाम करके हासिल किया जा सकता है। कुछ व्यवहारिक उपचार भी इस लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करते हैं। इसके इलावा वजन कम करने में मदद करने वाली कुछ दवाएं निम्न हैं:

  • ओर्लीस्टेट (क्सेनिकल)
  • ओर्कासेरिन (बेल्विक)
  • फेन्टरमाइन, टॉपिरैमेट (क्यूसिमिया)
  • बूप्रोपियन, नाल्टरेक्सोन (कंट्रावे)
  • लिराग्लुटाइड (सक्सेंडा)

मोटापे के लिए उपचार – होम्योपैथिक उपचार

नेट्रम मयूरिटीकम  – यह शरीर के अन्य हिस्सों की तुलना में मुख्य रूप से जांघों और नितंबों में फैट अधिक होने के लिए दी जाती है। यह तब भी दी जाती है जब लंबे समय तक लगातार तनाव या डिप्रेशन के कारण व्यक्ति ने वजन ज्यादा बढ़ा लिया हो|

लाइकोपोडियम – इसका मुख्य रूप से तब उपयोग किया जाता है जब जांघों और नितंब के क्षेत्रों में अतिरिक्त फैट होता है| लेकिन जिन रोगियों को लाइकोपोडियम की आवश्यकता होती है वे पेट फूलने और कब्ज जैसी गैस्ट्रिक परेशानियों के पुराने रोगी होते हैं।

नक्स वोमिका – यह उन लोगों के लिए तय की गयी है जिन्होंने अपनी आदतों के कारण अतिरिक्त वजन बढ़ा लिया है।

एंटीमोनियम क्रूडम – यह मोटे बच्चों के लिए और उन बच्चों को दी जाती है जिनको बहुत ज्यादा  चिड़चिड़ाहट होती है|

इग्नाटिया – जब डिप्रेशन से वजन बढ़ने लगता है और रोगी आमतौर पर उदासी के कारण काफी हद तक खाते हैं जिससे वजन बढ़ जाता है।

ग्रेफाइट्स – यह निर्धारित किया जाता है जब महिलाओं को रजोनिवृत्ति के आसपास अतिरिक्त वजन प्राप्त होता है।

थायराइडिनम – जब मोटापा थायराइड ग्रंथि के अपूर्ण काम के कारण होता है तब यह दवा दी जाती है|

पलसटिला – यह दवा तब दी जाती है जब गर्भाशय की समस्याओं के कारण मोटापा होता है।

मोटापा – जीवन शैली के टिप्स

  • मोटापे के बारे में सीखना जीवन में बदलाव लाने में और इसके वास्तविक कारण को समझने में मदद करता है| यह हानिकारक भी हो सकता है।
  • व्यायाम, और आहार में छोटे बदलावों से वजन घटाने में मदद मिलती है| रोजाना या हफ्ते के लक्ष्यों को स्थापित करने से आप अपने लक्ष्य को तेज़ी से और बेहतर तरीके से पा सकते हैं।
  • अपने इलाज़ की योजना से चिपके रहें और अपने आप को मोटापे से बाहर निकालने के लिए स्वयं को प्रेरित करें| ऐसे छोटे कदम उठाकर आप अपनी अच्छी तरह से मदद कर सकते हैं।
  • दैनिक भोजन का सेवन और वजन घटाने का रिकॉर्ड रखने से आप अपने खाने और व्यायाम की आदतों में बने रह सकते हैं।
  • अपनी दवाएं लेना और अपनी खुराक लेना ना भूलें|

मोटापे वाले व्यक्ति के लिए क्या व्यायाम हैं?

  • कार्डियो व्यायाम जैसे हर हफ्ते 30 से 60 मिनट के लिए तैरना और भागना वह भी तीन अलग-अलग 10 मिनट के सत्रों में।
  • छाती और पैर पर दबाव, हर सप्ताह पैर एक्सटेंशन जैसे ताकत प्रशिक्षण; 12 के 2 सेट बार बार|

मोटापा और गर्भावस्था – जानने योग्य बातें

  • गर्भावस्था के दौरान मोटापा खतरनाक है और गर्भावस्था में मधुमेह, प्रिक्लेम्पिया और स्लीप एपने का कारण बन सकती है।
  • मोटापे वाली महिलाओं में गर्भपात और बच्चे के जन्म में दोष होने का खतरा बढ़ गया है।
  • गर्भावस्था के दौरान मोटापे से बच्चे के दिल की धड़कन की जांच करना भी मुश्किल हो सकता है।
  • मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में प्रिक्लेम्प्शिया भी समय से पहले जन्म का कारण बन सकता है।
  • गर्भावस्था से पहले वजन कम करना जन्म की समस्याओं को रोकने में मदद कर सकता है।
  • मोटापा होने के बावजूद वजन, आहार और व्यायाम करने से गर्भावस्था स्वस्थ हो सकती है।

मोटापे से संबंधित सामान्य परेशानियाँ

  • उच्च ट्राइग्लिसराइड्स और लो हाई डेंसिटी लिपोप्रोटीन (एचडीएल) कोलेस्ट्रॉल
  • टाइप-2 मधुमेह
  • उच्च रक्त चाप
  • दिल की बीमारी
  • स्ट्रोक
  • सांस के विकार
  • पित्ताशय का रोग
  • स्त्री रोग संबंधी समस्याएं
  • लिंग के टेढ़ेपन का दोष और यौन स्वास्थ्य के मुद्दों
  • एंटी-अल्कोहल फैटी लिवर डिजीज
  • पुराना ऑस्टियो-आर्थराइटिस

सामान्य प्रश्न

अधिक वजन और मोटापे से ग्रस्त होने के बीच क्या अंतर है?

यह अक्सर मास इंडेक्स (बीएमआई) को नापकर तय किया जाता है कि वजन और ऊंचाई के बीच क्या अनुपात होता है। 25 और 29.9 के बीच बीएमआई का मतलब है कि आप अधिक वजन वाले हैं और आपको अधिक मोटापा है।

मोटापा बढ़ती समस्या क्यों है?

खाने पीने की आदतों में बदलावों के कारण मीडिया का उपयोग जैसे टीवी देखना और फोन और कम शारीरिक गतिविधि का उपयोग करना।

वजन कम करने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?

वजन कम करने का सबसे अच्छा तरीका स्वस्थ आहार का पालन करना और हर हफ्ते कम से कम 200 मिनट या 5 बार नियमित रूप से व्यायाम करना है।

मोटापे के लिए लिपोसक्शन क्या काम करता है?

लिपोसक्शन एक कॉस्मेटिक प्रक्रिया है जो शरीर को फिर से आकार देती है और चिकना बनाती है। हालांकि यह अतिरिक्त और अवांछित जमे हुए फैट को हटा देता है| यह आहार और शारीरिक गतिविधि के लिए एक विकल्प नहीं है और ना ही मोटापे का इलाज है।

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