रेबीज मनुष्यों और अन्य स्तनधारियों में मस्तिष्क की सूजन का कारण होता है जो इन्फेक्टेड पशु की लार के कारण होता है। यह एक वायरल बीमारी है। इसके शुरुआती लक्षण फ्लू जैसे लक्षणों के समान होते हैं और बाद में हिंसक गतिविधियों, अनियंत्रित उत्तेजना, पानी से डर, शरीर के हिस्सों को स्थानांतरित करने में असमर्थता, भ्रम या चेतना का नुकसान होता है। इनक्यूबेशन  पीरियड में सेंट्रल नर्वस सिस्टम तक पहुंचने के लिए वायरस पेरीफेरल नसों से यात्रा करता है।

कुत्ते रेबीज फैलाने के लिए सबसे आम जानवर हैं। 2016 तक लक्षण दिखने के बाद केवल चौदह लोग रेबीज से बच पाए थे। 2015 में विश्व स्तर पर रैबीज से 17,400 मौतें हुई थीं। भारत में प्रति वर्ष 100 हजार से कम मामले दर्ज किए गए हैं।

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रेबीज शरीर को कैसे प्रभावित करता है?

रेबीज वायरस मस्तिष्क तक पहुंचने के लिए नर्वस सिस्टम का उपयोग करता है। मस्तिष्क से यह लार ग्रंथियों से घुसपैठ करता है, जिससे रोगी बहुत ज्यादा थूकने लगता है| काटने से यह  वायरस आसानी से फैलता है। यदि इसका इलाज ना किया जाए तो रेबीज अंत में मस्तिष्क में ही रह जाता है, तब रोगी अजीब हरकतें करना शुरू कर देता है और आखिर में मर जाता है।

रेबीज के कारण क्या हैं?

रेबीज लीसा वायरस के कारण होता है जिसमें रेबीज वायरस पाया जाता है। यह तब फैलता है जब इन्फेक्टेड जानवर (विशेष रूप से कुत्ते या चमगादड़) किसी अन्य जानवर या मानव को काट लेते हैं| संक्रमित जानवर के लार से भी बीमारी फैलती है यदि यह लार आंखों, मुंह या नाक के संपर्क में आता है।

रेबीज के खतरे के कारक क्या हैं?

रेबीज होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है जब:

  • उस जगह पर काटा जाए जहां रेबीज अभी भी मौजूद है।
  • जानवर बीमार दिखता है या असामान्य व्यवहार दिखाता है।
  • संक्रमित जानवर का लार घाव या कफ वाली झिल्ली के संपर्क में आता है।

रेबीज के लक्षण क्या हैं?

रेबीज के शुरुआती लक्षणों में बुखार और सिरदर्द होता है। रेबीज की प्रगति से यह मस्तिष्क या मेनिंगों की सूजन का कारण बनता है जिनमें निम्न शामिल हैं:

  • थोड़ा या आंशिक पक्षाघात
  • चिंता
  • अनिद्रा
  • उलझन
  • उत्तेजना
  • व्यवहार में असामान्य परिवर्तन
  • हेलुसिनेशन की वजह से डेलिरियम और कोमा
  • प्यास बढना और हाइड्रोफोबिया गले और लारनेक्स में मांसपेशियों के दर्दनाक स्पैम का कारण बन सकता है।
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रेबीज को कैसे पहचाना जाता है?

रेबीज की पहचान करना मुश्किल है।

लार, त्वचा या मस्तिष्क के टिश्यूओं में रेबीज वायरस की खोज करने के लिए प्रयोगशाला जांच की जा सकती है लेकिन इससे इलाज के लिए बहुत देर हो चुकी होती है| जब तक बीमारी में देर तक संभव नहीं है। इसकी पहचान आमतौर पर आसान हो जाती है यदि वह पशु भी जांच के लिए उपलब्ध हो|

रेबीज को कैसे रोकें और नियंत्रित करें?

पेट वैक्सीनेशन – बिल्लियों, कुत्तों और बिलाव का रेबीज के खिलाफ टीकाकरण किया जाना चाहिए।

पालतू जानवरों को सीमित रखें – पालतू जानवरों को अंदर रखें और जब वे बाहर जाएँ तो उनकी निगरानी करें ताकि वे जंगली जानवरों के संपर्क में आने से बच सकें|

शिकारियों से छोटे पालतू जानवरों को सुरक्षित रखें – छोटे सूअरों और खरगोशों जैसे छोटे पालतू जानवरों को रेबीज के खिलाफ टीका नहीं दिया जा सकता है इसलिए उन्हें अंदर रखें और जंगली जानवरों से उन्हें बचाकर रखें।

भटक रहे जानवरों की रिपोर्ट करें – अपने स्थानीय पशु नियंत्रण अधिकारियों को भटक रहे ​​कुत्तों और बिल्लियों की रिपोर्ट करके बुलाएं।

जंगली जानवरों से संपर्क न करें – रेबीज वाले जंगली जानवर लोगों से डर सकते हैं इसलिए ऐसे किसी भी जानवर से दूर रहें जो दुखी दिखाई देता हो|

रेबीज का टीकाकरण – यदि किसी ऐसे देश की यात्रा करनी हो जहां रेबीज आम है तो अपने डॉक्टर से पूछें कि क्या आपको रेबीज का टीका लगवाना चाहिए।

रेबीज का उपचार – एलोपैथिक उपचार

साबुन और पानी से घाव को जितनी जल्दी हो सके धोएं| लगभग पांच मिनट ही वायरल कणों की संख्या को कम करने में काफी होते हैं| बाद में वायरस को कम करने के लिए पोविडोन-आयोडीन या अल्कोहल प्रयोग करने की सलाह दी जाती है।

एक्सपोजर के बाद इस रोग की रोकथाम इलाज से ही हो सकती है लेकिन तभी जब इसे तुरंत संक्रमण के लगभग 10 दिनों के अंदर लिया जाए| फिर भी रेबीज के खिलाफ एक टीका तो तुरंत लक्षणों को देखे बिना ही दे दिया जाता है। यह इसलिए कि इनक्यूबेशन पीरियड लम्बा होने की वजह से यह नर्वस सिस्टम को बर्बाद कर देता है और अंत में मृत्यु का कारण होता है।

रेबीज का टीका की पहली खुराक के एक्सपोजर के बाद ही दिया जाता है, जिसमें पहली बार 3, 7 और 14 दिनों की अतिरिक्त खुराक देते हैं। जिन मरीजों को पूर्व-एक्सपोजर टीकाकरण हुआ हो, उन्हें इम्यूनोग्लोबुलिन नहीं दिया जाता, केवल 0 और 3 दिनों में पोस्ट-एक्सपोजर टीकाकरण दे दिया जाता है।

रेबीज के लिए उपचार – होम्योपैथिक उपचार

रेबीज के लिए किसी होम्योपैथिक दवा की जानकारी नहीं है। इसलिए अपने डॉक्टर से पूछें|

रेबीज – जीवन शैली के टिप्स

  • भविष्य में रेबीज के हमले को रोकने के लिए अपने पालतू जानवर को टीका लगवाएं|
  • यदि आपको इन्फेक्टेड जानवर ने काटा है तो बताई गयी खुराक जरूर पूरी करें।
  • बच्चों को जंगली जानवरों से दूर रखें।

रेबीज वाले व्यक्ति के लिए क्या व्यायाम हैं?

रेबीज के को किसी विशेष व्यायाम करने की सलाह नहीं दी जाती|

रेबीज और गर्भावस्था – जानने योग्य बातें

गर्भावस्था और नवजात शिशु की मां पर रेबीज के प्रभाव के बारे में बहुत कम अध्ययन हुआ है। लेकिन यदि गर्भवती मां को किसी घातक जानवर ने काटा है तो उसे टीका दिया जाता है जो कि प्रभावी साबित होता है और बच्चे को नुकसान नहीं पहुंचाता।

रेबीज से संबंधित सामान्य परेशानियां

इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।

सामान्य प्रश्न

पशु के काटने पर घाव के साथ क्या नहीं करना चाहिए?

मिर्च पाउडर, पौधे के रस, एसिड या क्षारों जैसी चिरचिराने वाली चीज़ें ना लगायें और ना ही घावों को कपड़े या पट्टियों से कवर करें|

यदि टीका लगा हुआ कुत्ता काटता है तो क्या रेबीज के खिलाफ टीकाकरण जरूरी है?

ए नहीं, यदि कुत्ते को रेबीज के खिलाफ ठीक से टीका लगवाया हुआ है और टीके की प्रभावकारिता की पुष्टि हो चुकी है तो उचित समय पर पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफेलेक्सिस दिया जाना चाहिए।

क्या रेबीज के खिलाफ कोई सिंगल डोज़ वैक्सीन है जो जीवनभर सुरक्षा दे?

नहीं, दुनिया में कहीं भी कोई ऐसी खुराक नहीं है जो जीवन भर रक्षा करती है।

क्या टीकाकरण से रेबीज होना संभव है?         

मानव उपयोग के लिए रेबीज का टीका निष्क्रिय है|

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