रूमेटोइड गठिया (Rheumatoid Arthritis in Hindi): लक्षण, कारण, निदान और उपचार

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Rheumatoid Arthritis in Hindi

रूमेटोइड गठिया एक ऑटोम्यून्यून विकार है जो जोड़ों को प्रभावित करता है। इसकी वजह से आमतौर पर जोड़ गर्म, सूजे हुए और दर्द से भरे होते हैं जो अक्सर आराम करने के बाद और खराब हो जाते हैं। यह रोग शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है जिसके कारण लाल रक्त कोशिकाओं की गिनती, फेफड़ों के आसपास की सूजन और दिल के चारों ओर सूजन हो सकती है।

रूमेटोइड गठिया शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली और जोड़ों पर हमला करता है। इलाज से इनका दर्द कम हो जाता है, सूजन कम हो जाती है और किसी व्यक्ति की कार्यप्रणाली में सुधार होता है।

2015 तक रूमेटोइड गठिया ने 24.5 मिलियन लोगों को प्रभावित किया था। यह मध्यम आयु में सबसे अधिक ज्यादा होता है और महिलाओं में पुरुषों से 2.5 गुना ज्यादा होता है। भारत में, हर साल 1 मिलियन से ज्यादा मामलों की सूचना दी गयी है।

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रूमेटोइड गठिया शरीर को कैसे प्रभावित करता है?

रूमेटोइड गठिया एक ऑटो-प्रतिरक्षा विकार है जहां प्रतिरक्षा प्रणाली जोड़ों को घेरे हुए झिल्ली की परत सिनोवियम पर हमला करती है। जोड़ों की सूजन सिनोवियम को मोटा करती है, जिससे जोड़ों के भीतर कार्ट्रिज और हड्डी नष्ट कर सकती है। टेंडन और लिगामेंट्स जो जोड़ को पकड़कर रखते हैं धीरे-धीरे अपना आकार खो देते हैं।

रूमेटोइड गठिया के क्या कारण हैं?

रूमेटोइड गठिया का कारण अभी साफ़ नहीं है और ऐसा माना जाता है कि बीमारी को ट्रिगर करने में अनुवांशिक और पर्यावरणीय कारक ही शामिल होते हैं।

रूमेटोइड गठिया के खतरे के लिए क्या कारक हैं?

लिंग – पुरुषों की तुलना में महिलाओं को आरए विकसित करने की अधिक संभावना है।

आयु – हालांकि यह किसी भी उम्र में हो सकती है, यह आमतौर पर 40 से 60 वर्ष की उम्र के बीच शुरू होती है।

पारिवारिक इतिहास – अगर परिवार के सदस्य को होता है, तो उसकी अगली पीढ़ी में बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।

धूम्रपान – धूम्रपान करने से रूमेटोइड गठिया का खतरा बढ़ जाता है|

पर्यावरण एक्सपोजर – ऐसा माना जाता है कि एस्बेस्टोस या सिलिका जैसे कुछ एक्सपोजर रूमेटोइड गठिया के विकास के खतरे को बढ़ा सकता है।

मोटापा – अधिक वजन और मोटापे से ग्रस्त लोग रूमेटोइड गठिया होने के खतरे बढ़ जाते हैं|

रूमेटोइड गठिया के लक्षण क्या हैं?

कठोरता – जोड़ इतने कठोर हो जाते हैं कि चलना फिरना मुश्किल हो जाता है और सुबह में आम होना चाहिए। रूमेटोइड गठिया वाले लोगों के जोड़ों को ढीला महसूस होने में एक घंटे का समय लग जाता है।

सूजन – जोड़ों का तरल पदार्थ जमा होने के कारण वे फूले हुए दिखते हैं|

दर्द – जोड़ों में सूजन और दर्द होता है चाहे आप चल-फिर रहे हों या नहीं। जोड़ लाल और गर्म हो सकते हैं और सूजन की वजह से इनके रंग में बदलाव दिख सकता है।

दिल और खून की नलियाँ – रूमेटोइड गठिया वाले लोग एथेरोस्क्लेरोसिस होने की ज्यादा  सम्भावना होती है और दिल का दौरा और स्ट्रोक होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

रक्त – रूमेटोइड गठिया के कारण पुरानी सूजन हेपसीडिन के स्तर को बदा देती है, जिससे पुरानी बीमारी एनीमिया हो जाती है क्योंकि यह आयरन को सोख लेता है|

गुर्दे – अनियंत्रित पुरानी सूजन के कारण रेनाल एमिलॉयडोसिस हो सकता है।

लिवर – जिगर की समस्या इस बीमारी के इलाज के लिए उपयोग की जाने वाली दवाओं के परिणामस्वरूप हो सकती है।

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रूमेटोइड गठिया को कैसे पहचाना जाता है?

रूमेटोइड गठिया को शुरुआती चरणों में पहचानना मुश्किल हो सकता है क्योंकि शुरुआती संकेत और लक्षण कई अन्य बीमारियों जैसे होते हैं।

खून की जांच – इससे अक्सर एलिवेटेड एरिथ्रोसाइट सेडीमेंटेशन की दर या सी-रिएक्टिव प्रोटीन (सीआरपी), जो शरीर में एक इंफ्लेमेटरी प्रक्रिया की उपस्थिति का संकेत हो सकते है। अन्य रक्त परीक्षण रूमेटोइड फैक्टर और एंटी-साइक्लिक सिटरुलिनाटेड पेप्टाइड (एंटी-सीसीपी) एंटीबॉडी आदि हैं|

इमेजिंग टेस्ट – समय के साथ जोड़ों में रूमेटोइड गठिया के बढने के कारण जोड़ों का एक्स-रे  किया जाता है। एमआरआई और अल्ट्रासाउंड परीक्षण शरीर में बीमारी की गंभीरता को जानने में मदद कर सकते हैं।

रूमेटोइड गठिया को कैसे रोकें और नियंत्रित करें?

इसके खतरे के कारणों में कमी के अलावा इसके लिए कोई ज्ञात रोकथाम नहीं है। जब आरए बढ़ता है तो यह महत्वपूर्ण है कि जोड़ों को नुकसान से रोका जाए| निम्न उपाय करके इससे होने वाले नुकसान को रोकने में मदद मिल सकती है:

जल्दी इलाज करें – यदि आपको इसके समान लक्षणों का अनुभव होता है तो इसका इलाज़  शुरू करने के लिए जल्दी चेक करवाएं|

व्यायाम – व्यायाम जोड़ों को मजबूत बनाता है।

आराम करें – अधिक समय तक आराम न करें और आराम करने के समय और व्यायाम के बीच संतुलन बनाए रखें|

धूम्रपान छोड़ें – धूम्रपान छोड़ने से इसके होने का खतरा कम हो सकता है।

रूमेटोइड गठिया का उपचार – एलोपैथिक उपचार

उपयोग की जाने वाली दवाएं-

एन.एस.ए.आई.डी – ये दर्द से छुटकारा दिलाकर सूजन को कम कर सकते हैं क्योंकि इनमे  इबुप्रोफेन (एडविल, मोटरीन आईबी) और नैप्रॉक्सन सोडियम (एलेव) शामिल हैं।

स्टेरॉयड – प्रीनिनिस जैसे कॉर्टिकोस्टेरॉइड सूजन, दर्द और जोड़ों की हानि को कम करता है।

जीवविज्ञान एजेंट – ये एजेंट प्रतिरक्षा प्रणाली के कुछ हिस्सों को ही लक्ष्य करते हैं जो सूजन को ट्रिगर करते हैं, जोकि जोड़ों और टिश्यूओं की हानि का कारण होता है। बायोलॉजिक डीएमएआरएस आमतौर पर सबसे प्रज्यादा भावी होते हैं जब इन्हें गैर-जैविक द्रमर्ड जैसे मेथोट्रैक्साईट से जोड़ा जाता है।

सर्जरी में:—

स्य्नोवेक्टोमी – यह सर्जरी सूजे हुए जोड़ की परत को हटाने के लिए की जाती है और घुटने, कोहनी, कलाई, उंगलियों और कूल्हों पर की जाती है।

कंधे की मरम्मत – सूजन और नुक्स्सन की वजह से जोड़ों के चारों ओर के टेंडन ढीले या टूटने का कारण हो सकते हैं| जिसकी इस सर्जरी के द्वारा मरम्मत की जा सकती है।

जॉइंट फ्यूज़न – जब जोड़ों के ट्रांसप्लांट का कोई विकल्प नहीं होता है तो सर्जरी से जोड़ों को जोड़ दिया जाता ही जिससे दर्द में आराम मिलने के साथ साथ जोड़ स्थिर भी हो सकते है|

पूरे जोड़ का ट्रांसप्लांट – जोड़ का ट्रांसप्लांट सर्जरी के दौरान जोड़ों के जुक्सान हुए हिस्सों को हटा देता है और उसमे धातु और प्लास्टिक से बना प्रोस्थेसिस डालता है।

रूमेटोइड गठिया का उपचार – होम्योपैथिक उपचार

कास्टिकम – यह रूमेटोइड गठिया के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है। जब रोगी में आमतौर पर समय से पहले मांसपेशियों की शक्ति में कमी आ जाती है।

कौफोफिलम – यह रूमेटोइड गठिया के लिए प्रभावी है और आमतौर पर महिलाओं के लिए उपयोग किया जाता है। अंगों के बड़े जोड़ों की तुलना में जब छोटे जोड़ ज्यादा प्रभावित होते हैं  तो इस दवा का उपयोग किया जाता है।

कोल्लिकम – इसका उपयोग आमतौर पर पुराने रूमेटोइड गठिया के दौरान करने की जरूरत  होती है।

लेडम पाल – इस दवा का उपयोग तब किया जाता है जब रूमेटोइड पैर में शुरू होता है और शरीर के ऊपरी जोड़ों तक फैलता है। पैर की अंगुली और टखने में सूजन इसके आम लक्षण है।

ब्रायोनिया – यह दवा तब प्रयोग की जाती है जब सभी जोड़ों और उसकी झिल्ली में सूजन आ जाती है।

रूमेटोइड गठिया – जीवन शैली के टिप्स

जोड़ों के चारों ओर की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करें| इससे जीवन में तनाव को कम करने और मांसपेशियों के दर्द को कम करने में मदद मिल सकती है।

रूमेटोइड गठिया वाले व्यक्ति के लिए क्या व्यायाम हैं?

  • हर हफ्ते 150 मिनट के लिए चलें, बाइकिंग करें या एरोबिक व्यायाम करें।
  • लचीलेपन की गतिविधियां हर रोज़ 5 से 10 मिनट तक करें|
  • भारोत्तोलन या अन्य अभ्यास हर सप्ताह कम से कम दो दिन जरूर करें|

रूमेटोइड गठिया और गर्भावस्था – जानने योग्य बातें

  • यह देखा गया था कि रूमेटोइड गठिया के साथ 75% से अधिक महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान लक्षणों में सुधार होता है लेकिन डिलीवरी के बाद लक्षण खराब हो सकते हैं।
  • मेथोट्रैक्साईट और लेफ्लुनोमाइड जैसी दवाएं टेराटोजेनिक (भ्रूण के लिए हानिकारक) हैं और गर्भावस्था के दौरान इनका उपयोग नहीं करना चाहिए|
  • गर्भावस्था की योजना बनाने के लिए और गर्भावस्था से बचने के लिए गर्भ निरोधकों का उपयोग करना चाहिए।
  • प्रीनिनिसोलोन की कम खुराक, हाइड्रोक्साइक्लोक्वाइन और सल्फासलाज़ीन गर्भवती महिलाओं में रूमेटोइड गठिया से सुरक्षित माना जाता है।

रूमेटोइड गठिया से संबंधित सामान्य परेशानियाँ

  • ऑस्टियोपोरोसिस।
  • रूमेटोइड नोड्यूल।
  • सूखी आंखें और मुंह।
  • संक्रमण।
  • असामान्य शरीर संरचना।
  • कार्पल टनल सिंड्रोम।
  • हृदय की समस्याएं।
  • फेफड़ों की बीमारी।
  • लिंफोमा

सामान्य प्रश्न

रूमेटोइड गठिया में आम तौर पर कौन से जोड़ शामिल होते हैं?

सबसे आम जोड़ों में हाथों और पैरों के छोटे जोड़ होते हैं। इसके इलावा कलाई, कोहनी, कंधे, गर्दन, कूल्हों, घुटनों और टखने के जोड़ भी शामिल हो सकते हैं।

क्या रूमेटोइड गठिया सिर्फ जोड़ों को ही ज्यादा प्रभावित करता है?

रूमेटोइड गठिया हमेशा जोड़ों तक सीमित नहीं होता और त्वचा, आंखों, दिल, फेफड़ों, नसों, रक्त और खून की नलियां शरीर के अन्य हिस्सों को प्रभावित कर सकता है।

क्या रूमेटोइड गठिया के लिए कोई इलाज है?

नहीं, केवल दवाएं रूमेटोइड गठिया के इलाज में प्रभावी साबित हुई हैं, रोगी के लक्षणों को कम करने और हड्डी में परिवर्तन धीमा कर रही हैं।

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