साबुन रोज़ इस्तेमाल होने वाले उन प्रोडक्ट्स में से है जिन्हें ज़्यादातर लोग आदत, ब्रांड या ऑफर देखकर खरीदते हैं। लेकिन यही प्रोडक्ट हर दिन पूरे शरीर की त्वचा पर लगता है, इसलिए इसका असर रूखेपन, खुजली, पसीने की गंध और त्वचा के आराम पर साफ दिखता है।
हर साबुन एक जैसा नहीं होता। बाज़ार में मिलने वाले कई बार असल में टॉयलेट साबुन नहीं, बल्कि बाथिंग बार होते हैं, और दोनों की बनावट, pH और त्वचा पर असर अलग होता है। इसी तरह TFM, खुशबू, ग्लिसरीन या एंटीसेप्टिक तत्व भी तय करते हैं कि कोई साबुन किस त्वचा के लिए बेहतर है।
इस लेख में 10 लोकप्रिय विकल्पों को त्वचा के प्रकार और ज़रूरत के हिसाब से बांटा गया है, ताकि आप सिर्फ नाम देखकर नहीं, बल्कि रैपर पढ़कर अपने लिए सही साबुन चुन सकें।
साबुन खरीदने से पहले एक ज़रूरी बात
इस लेख में दो तरह की जानकारी है।
- प्रोडक्ट की जानकारी ब्रांड के आधिकारिक पेज, पैकेट पर घोषित TFM और BIS के मानकों से ली गई है। TFM का आंकड़ा वेरिएंट और बैच के हिसाब से बदल सकता है, इसलिए खरीदते वक्त रैपर पर खुद देख लेना सबसे भरोसेमंद तरीका है।
- इस्तेमाल को लेकर दी गई सलाह हमारी संपादकीय राय है और ये किसी त्वचा रोग विशेषज्ञ की सलाह की जगह नहीं लेती। अगर आपको एक्ज़िमा, सोरायसिस, बार-बार होने वाली खुजली या कोई और त्वचा की स्थिति है, तो साबुन का चुनाव डॉक्टर से पूछकर कीजिए।
नहाने के लिए सबसे अच्छे साबुन के नाम की लिस्ट
भाग 1: रूखी और संवेदनशील त्वचा के लिए
इस हिस्से के चारों विकल्प बाथिंग बार या सिंडेट श्रेणी के हैं, यानी इनके रैपर पर TFM नहीं मिलेगा। इनका मकसद ही ये है कि सफाई हो लेकिन त्वचा की अपनी चिकनाई कम से कम छिने।
Sebamed Cleansing Bar (pH 5.5)

सीधी बात: इस लिस्ट में यही अकेला ऐसा विकल्प है जिसकी पूरी पहचान ही उसके pH पर टिकी है।
Sebamed एक जर्मन ब्रांड है और इसका पूरा दावा इसी एक बात के इर्द-गिर्द है कि इसका pH 5.5 है, यानी स्वस्थ त्वचा की सतह के करीब। भारत में इसी दावे को लेकर कुछ साल पहले बड़ी विज्ञापन बहस भी चली थी।
इसमें है क्या और वो करता क्या है: ये साबुन-रहित सिंडेट बार है। इसमें पारंपरिक साबुन की जगह हल्के सिंथेटिक सर्फेक्टेंट इस्तेमाल होते हैं, इसीलिए इसका pH क्षारीय नहीं होता। यही एक बदलाव सबसे बड़ा फर्क डालता है, क्योंकि त्वचा को अपना संतुलन दोबारा पाने में मेहनत नहीं करनी पड़ती।
नहाते वक्त कैसा लगता है: झाग पारंपरिक साबुन जितना घना नहीं बनता, और शुरू में ये अटपटा लग सकता है क्योंकि हम सब झाग को सफाई मान बैठे हैं। लेकिन नहाने के बाद त्वचा पर कसाव नहीं रहता।
कितने का है और कितने दिन चलेगा: 100 ग्राम की टिकिया में आता है और कीमत इस लिस्ट में सबसे ऊपर है। एक साधारण साबुन से कई गुना महंगा पड़ता है।
ये किन लोगों के लिए है: बहुत रूखी और संवेदनशील त्वचा। जिन्हें नहाने के बाद खुजली होती है। सर्दियों के महीने, जब उत्तर भारत की सूखी हवा में लगभग हर किसी की त्वचा खिंचने लगती है।
ये किन लोगों के लिए नहीं है: जिनकी त्वचा सामान्य है और जिन्हें कोई शिकायत नहीं है। ऐसे लोगों को इतना खर्च करने की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी।
एक बात जो डिब्बे पर नहीं लिखी होती: pH 5.5 का दावा असली और काम का है, लेकिन ये कोई इलाज नहीं है। अगर आपकी त्वचा की दिक्कत आम रूखेपन से आगे बढ़ चुकी है, तो साबुन बदलने से पहले डॉक्टर से मिलिए।
पूरा फायदा चाहिए तो ये कीजिए: नहाने के बाद तीन मिनट के अंदर, जब त्वचा हल्की नम हो, तभी मॉइस्चराइज़र लगाइए। सही साबुन और सही समय पर लगा मॉइस्चराइज़र, ये जोड़ी अकेले साबुन से कहीं ज़्यादा काम करती है।
Cetaphil Gentle Cleansing Bar

सीधी बात: जिस त्वचा पर हर दूसरा प्रोडक्ट प्रतिक्रिया कर जाता है, उसके लिए इस लिस्ट का सबसे सुरक्षित विकल्प।
भारत में संवेदनशील त्वचा के लिए डर्मेटोलॉजिस्ट जिन ब्रांड्स का नाम सबसे ज़्यादा लेते हैं, Cetaphil उनमें है। इनका बार भी उसी सोच पर बना है जिस पर इनका फेस वॉश, यानी फॉर्मूले में जितनी कम चीज़ें होंगी, प्रतिक्रिया की आशंका उतनी कम रहेगी।
इसमें है क्या और वो करता क्या है: ये भी सिंडेट बार है, यानी पारंपरिक साबुन नहीं। इसमें जानबूझकर ऐसा कुछ नहीं डाला गया जो त्वचा को उकसाए। न तेज़ खुशबू, न रंग, न कोई तेज़ सक्रिय तत्व। सफाई हल्के सर्फेक्टेंट से होती है और फॉर्मूले में नमी बनाए रखने वाले तत्व मिले होते हैं।
नहाते वक्त कैसा लगता है: झाग मध्यम बनता है और नहाने के बाद त्वचा नरम लगती है, खिंची हुई नहीं। कोई तेज़ महक नहीं छोड़ता, जो उन लोगों के लिए राहत है जिन्हें खुशबू से सिरदर्द होता है।
कितने का है और कितने दिन चलेगा: ये आम साबुन से बड़ी टिकिया में आता है और कीमत मध्यम से ऊपरी श्रेणी में है। खरीदते वक्त पैक पर वज़न देख लीजिए, क्योंकि Cetaphil के बार कई साइज़ में मिलते हैं।
ये किन लोगों के लिए है: संवेदनशील और प्रतिक्रिया करने वाली त्वचा। जिनकी त्वचा किसी ट्रीटमेंट या दवा की वजह से रूखी हो गई है। पूरे परिवार के लिए एक सुरक्षित विकल्प, बड़ों और बच्चों दोनों के लिए, हालांकि छोटे बच्चों के लिए डॉक्टर से पूछ लीजिए।
ये किन लोगों के लिए नहीं है: जिन्हें नहाने के बाद ताज़गी और तेज़ खुशबू चाहिए। ये बार उस अनुभव के लिए बना ही नहीं है।
एक बात जो डिब्बे पर नहीं लिखी होती: Cetaphil के कई प्रोडक्ट एक जैसी पैकेजिंग में आते हैं और ऑनलाइन तस्वीरों में फर्क करना मुश्किल होता है। ऑर्डर करने से पहले पूरा नाम पढ़ लीजिए।
पूरा फायदा चाहिए तो ये कीजिए: गुनगुने पानी से नहाइए, बहुत गर्म से नहीं। गर्म पानी त्वचा की चिकनाई तेज़ी से घोल देता है और सर्दियों में यही सबसे आम गलती है।
Dove Cream Beauty Bathing Bar

सीधी बात: सिंडेट बार का सबसे आसानी से मिलने वाला विकल्प, जो लगभग हर किराने की दुकान पर मौजूद है।
Dove ने भारत में इसी एक बात पर अपना पूरा विज्ञापन खड़ा किया है कि वो साबुन नहीं है। ये दावा तकनीकी रूप से सही है और रैपर पर “बाथिंग बार” लिखा होना इसका प्रमाण है।
इसमें है क्या और वो करता क्या है: इसमें हल्के सिंथेटिक सर्फेक्टेंट के साथ चौथाई हिस्सा मॉइस्चराइज़िंग क्रीम मिलाने का दावा किया जाता है। सफाई के दौरान ही कुछ नमी वापस देने की कोशिश इसी वजह से होती है। रैपर पर TFM नहीं मिलेगा, क्योंकि ये टॉयलेट साबुन की श्रेणी में आता ही नहीं।
नहाते वक्त कैसा लगता है: झाग क्रीमी और घना बनता है, और नहाने के बाद त्वचा पर हल्की चिकनाई का एहसास रहता है। यही एहसास कुछ लोगों को पसंद आता है और कुछ को लगता है कि साबुन पूरी तरह धुला नहीं।
कितने का है और कितने दिन चलेगा: 100 ग्राम और 125 ग्राम दोनों में मिलता है और कीमत आम साबुन से ज़्यादा लेकिन Sebamed या Cetaphil से काफी कम है। कॉम्बो पैक अक्सर प्रति टिकिया सस्ते पड़ते हैं।
ये किन लोगों के लिए है: रूखी और सामान्य त्वचा। वो लोग जो सिंडेट बार का फायदा चाहते हैं लेकिन फार्मेसी वाली कीमत नहीं देना चाहते। सर्दियों के लिए पूरे परिवार का एक व्यावहारिक विकल्प।
ये किन लोगों के लिए नहीं है: बहुत तैलीय त्वचा और पीठ पर मुंहासों की शिकायत वालों को इसकी चिकनाहट भारी लग सकती है।
एक बात जो डिब्बे पर नहीं लिखी होती: ये टिकिया पानी में जल्दी घुलती है। अगर इसे गीली साबुनदानी में छोड़ दिया जाए तो आधी बर्बाद हो जाती है, और तब ये सस्ता विकल्प नहीं रह जाता।
पूरा फायदा चाहिए तो ये कीजिए: ऐसी साबुनदानी इस्तेमाल कीजिए जिसमें पानी रुके नहीं और टिकिया दो बार के बीच में सूख जाए।
NIVEA Crème Soft Creme Soap

सीधी बात: सर्दियों के लिए बना क्रीम वाला विकल्प, जो कीमत और नमी के बीच अच्छा संतुलन बनाता है।
NIVEA की पहचान भारत में उनकी नीली डिब्बी वाली क्रीम से बनी है, और इस साबुन का मकसद भी वही है, यानी नहाने के दौरान ही थोड़ी नमी देना।
इसमें है क्या और वो करता क्या है: इसमें बादाम के तेल और NIVEA के क्रीम फॉर्मूले का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि सफाई के साथ त्वचा पर नमी बची रहे। ये रूखेपन को रोकने के लिए बनाया गया है, इलाज के लिए नहीं।
नहाते वक्त कैसा लगता है: क्रीमी झाग और NIVEA की वही पहचानी जाने वाली खुशबू। नहाने के बाद त्वचा मुलायम लगती है।
कितने का है और कितने दिन चलेगा: 125 ग्राम की टिकिया आम है और कीमत किफायती श्रेणी में है। ये इस भाग का सबसे सस्ता विकल्प है।
ये किन लोगों के लिए है: हल्की से मध्यम रूखी त्वचा। सर्दियों का रोज़ का इस्तेमाल। जिन्हें नहाने के बाद खुशबू अच्छी लगती है।
ये किन लोगों के लिए नहीं है: बहुत संवेदनशील त्वचा, क्योंकि इसमें खुशबू मौजूद है और यही कुछ लोगों में जलन की वजह बनती है।
एक बात जो डिब्बे पर नहीं लिखी होती: NIVEA के कई साबुन एक जैसी पैकेजिंग में आते हैं, जैसे Crème Soft, Crème Care और Milk Delights की पूरी रेंज। इनके मकसद अलग हैं, इसलिए खरीदते वक्त पूरा नाम पढ़ लीजिए।
पूरा फायदा चाहिए तो ये कीजिए: ये रूखेपन को रोकने में मदद करता है, लेकिन मॉइस्चराइज़र की जगह नहीं ले सकता। नहाने के बाद बॉडी लोशन लगाना फिर भी ज़रूरी है।
भाग 2: सामान्य त्वचा और रोज़ाना इस्तेमाल के लिए
इस हिस्से के चार में से तीन असली टॉयलेट साबुन हैं, यानी इनके रैपर पर TFM लिखा मिलेगा।
Mysore Sandal Soap

सीधी बात: भारत का सबसे मशहूर ग्रेड 1 साबुन, और उन गिने-चुने साबुनों में से एक जिसे भौगोलिक संकेत यानी GI टैग मिला हुआ है।
ये साबुन 1916 से बन रहा है और कर्नाटक सरकार की कंपनी KSDL इसे बनाती है। इतने दशकों तक टिके रहने की वजह सिर्फ पुरानी यादें नहीं हैं। इसका घोषित TFM आज भी भारतीय बाज़ार में सबसे ऊंचे आंकड़ों में से एक है, और चंदन का तेल असली इस्तेमाल होता है।
इसमें है क्या और वो करता क्या है: इसका मुख्य तत्व असली मैसूर चंदन का तेल है, साथ में बादाम का तेल और वनस्पति तेल। पैकेट पर घोषित TFM आमतौर पर 80 प्रतिशत बताया जाता है, जो इसे ग्रेड 1 श्रेणी में रखता है और भारतीय बाज़ार में सबसे ऊंचे आंकड़ों में से एक है। ज़्यादा TFM का मतलब है कम भराव और ज़्यादा असली साबुन।
नहाते वक्त कैसा लगता है: घना और क्रीमी झाग बनता है। चंदन की खुशबू तेज़ और देर तक टिकने वाली है, जो इस साबुन की सबसे बड़ी पहचान भी है और कुछ लोगों के लिए सबसे बड़ी आपत्ति भी।
कितने का है और कितने दिन चलेगा: 75 ग्राम, 125 ग्राम और 150 ग्राम में मिलता है। ऊंचे TFM की वजह से टिकिया कड़ी होती है और जल्दी घुलती नहीं, इसलिए ये उम्मीद से ज़्यादा चलती है। कीमत आम साबुन से ज़्यादा है, लेकिन चलने की अवधि जोड़ने पर हिसाब बराबर बैठ जाता है।
ये किन लोगों के लिए है: सामान्य त्वचा और रोज़ाना का इस्तेमाल। वो लोग जिन्हें ऊंचा TFM और असली सामग्री चाहिए। तोहफे में देने के लिए भी लोकप्रिय।
ये किन लोगों के लिए नहीं है: बहुत रूखी या संवेदनशील त्वचा। यहां वही बात लागू होती है जो ऊपर समझाई गई है, कि ज़्यादा TFM का मतलब ज़्यादा असली साबुन और ज़्यादा क्षारीय pH।
एक बात जो डिब्बे पर नहीं लिखी होती: इस साबुन की नकल बाज़ार में खूब बिकती है, खासकर ऑनलाइन और छोटी दुकानों पर। GI टैग, होलोग्राम और KSDL का नाम ज़रूर जांचिए।
पूरा फायदा चाहिए तो ये कीजिए: सर्दियों में अगर त्वचा खिंचने लगे तो इसे गर्मियों के लिए रख दीजिए और ठंड के महीनों में भाग 1 वाला कोई विकल्प चुनिए।
Santoor Sandal और Turmeric Soap

सीधी बात: सबसे ज़्यादा बिकने वाले भारतीय साबुनों में से एक, जो ऊंचे TFM और कम कीमत का मेल है।
Wipro का ये साबुन भारत के सबसे बड़े साबुन ब्रांड्स में गिना जाता है। इसकी वजह ये है कि ग्रेड 1 के आसपास वाला TFM और किराने की दुकान वाली कीमत, ये दोनों एक ही टिकिया में मिल जाते हैं।
इसमें है क्या और वो करता क्या है: इसमें चंदन और हल्दी के अर्क के साथ वनस्पति तेल हैं। चंदन त्वचा को शांत करने के लिए और हल्दी पारंपरिक रूप से रंगत के लिए इस्तेमाल होती आई है। कई वेरिएंट पर घोषित TFM 76 प्रतिशत के आसपास बताया जाता है, जो इसे ग्रेड 1 की सीमा पर रखता है।
नहाते वक्त कैसा लगता है: अच्छा झाग बनता है और खुशबू चंदन वाली है, लेकिन Mysore Sandal जितनी तेज़ नहीं। नहाने के बाद त्वचा पर हल्का ताज़ापन रहता है।
कितने का है और कितने दिन चलेगा: 100 ग्राम और 125 ग्राम में मिलता है और अक्सर तीन या चार के पैक में। कीमत किफायती श्रेणी में है, और कॉम्बो पैक लेने पर प्रति टिकिया और कम पड़ती है।
ये किन लोगों के लिए है: सामान्य त्वचा और पूरे परिवार का रोज़ का इस्तेमाल। वो लोग जो कम कीमत में ऊंचा TFM चाहते हैं।
ये किन लोगों के लिए नहीं है: बहुत रूखी त्वचा, खासकर सर्दियों में।
एक बात जो डिब्बे पर नहीं लिखी होती: Santoor के कई वेरिएंट हैं और उनका TFM एक जैसा नहीं होता। कुछ वेरिएंट बाथिंग बार श्रेणी के भी हैं। जो टिकिया आप उठा रहे हैं, उसी का रैपर पलटकर देखिए।
पूरा फायदा चाहिए तो ये कीजिए: कॉम्बो पैक खरीदते वक्त निर्माण तिथि देख लीजिए, क्योंकि बहुत पुरानी टिकिया सूखकर कड़ी हो जाती है।
Pears Pure और Gentle Soap

सीधी बात: पारदर्शी ग्लिसरीन वाला बार, जो दशकों से हल्के विकल्प के तौर पर जाना जाता है।
ये साबुन अपनी पारदर्शी बनावट की वजह से तुरंत पहचाना जाता है और भारत में पीढ़ियों से इस्तेमाल होता आ रहा है।
इसमें है क्या और वो करता क्या है: इसमें ग्लिसरीन और प्राकृतिक तेलों का इस्तेमाल होता है। ग्लिसरीन नमी खींचकर बांधने वाला तत्व है, और यही वजह है कि ये बार आम साबुन जितना सुखाने वाला नहीं लगता। ध्यान दीजिए, ये भी बाथिंग बार श्रेणी में आता है, इसलिए इसके रैपर पर TFM नहीं मिलेगा।
नहाते वक्त कैसा लगता है: झाग हल्का बनता है और नहाने के बाद त्वचा पर चिकनाई का हल्का एहसास रहता है। खुशबू हल्की और पहचानी जाने वाली है।
कितने का है और कितने दिन चलेगा: 75 ग्राम और 125 ग्राम में मिलता है। कीमत किफायती है, लेकिन ग्लिसरीन वाले बार पानी में तेज़ी से घुलते हैं, इसलिए ये उतने दिन नहीं चलता जितने दिन कोई कड़ा ग्रेड 1 साबुन चलता है।
ये किन लोगों के लिए है: सामान्य और हल्की रूखी त्वचा। बच्चों के लिए भी अक्सर चुना जाता है। जो लोग तेज़ खुशबू वाले साबुन से बचना चाहते हैं।
ये किन लोगों के लिए नहीं है: बहुत तैलीय त्वचा वालों को इसकी चिकनाहट पसंद नहीं आएगी।
एक बात जो डिब्बे पर नहीं लिखी होती: Pears के अब कई वेरिएंट हैं, जैसे Pure & Gentle, Soft & Fresh और Oil Clear। इनकी बनावट और मकसद अलग हैं। असली हल्का वाला Pure & Gentle है, यानी वो पारदर्शी एम्बर रंग वाला।
पूरा फायदा चाहिए तो ये कीजिए: इसे सूखी साबुनदानी में रखिए, वरना ये सबसे तेज़ी से घुलने वाले बार में से एक है।
Cinthol Original

सीधी बात: ऊंचे TFM के साथ ताज़गी वाला डियो साबुन, जो गर्मियों और पसीने के लिए बना है।
Godrej का ये साबुन दशकों से ताज़गी और लंबे समय तक टिकने वाली खुशबू के लिए जाना जाता है।
इसमें है क्या और वो करता क्या है: इसका घोषित TFM आमतौर पर 79 प्रतिशत के आसपास बताया जाता है, यानी ग्रेड 1 श्रेणी। इसमें डियोड्रेंट वाले तत्व मिलाए जाते हैं जो पसीने की गंध को रोकने में मदद करते हैं। यही इसे आम साबुन से अलग बनाता है।
नहाते वक्त कैसा लगता है: घना झाग और तेज़, देर तक टिकने वाली खुशबू। नहाने के बाद ताज़गी का एहसास साफ महसूस होता है।
कितने का है और कितने दिन चलेगा: 100 ग्राम और 125 ग्राम में मिलता है और अक्सर कॉम्बो पैक में। ऊंचे TFM की वजह से टिकिया कड़ी है और अच्छी चलती है। कीमत किफायती श्रेणी में है।
ये किन लोगों के लिए है: तैलीय और सामान्य त्वचा। गर्मी और उमस के महीने। जो लोग बाहर काम करते हैं, खेलते हैं या जिन्हें ज़्यादा पसीना आता है।
ये किन लोगों के लिए नहीं है: रूखी और संवेदनशील त्वचा। ऊंचा TFM, डियो तत्व और तेज़ खुशबू, ये तीनों मिलकर ऐसी त्वचा पर भारी पड़ सकते हैं।
एक बात जो डिब्बे पर नहीं लिखी होती: Cinthol की पूरी रेंज है, जैसे Original, Lime, Cool और Confidence+। इनके TFM और खुशबू अलग-अलग हैं। यहां बात सिर्फ Original वाले संस्करण की हो रही है।
पूरा फायदा चाहिए तो ये कीजिए: सर्दियों में इसे बदल दीजिए, या कम से कम नहाने के तुरंत बाद बॉडी लोशन ज़रूर लगाइए।
भाग 3: खास ज़रूरतों के लिए
इस हिस्से के दोनों विकल्प रोज़, पूरे परिवार के लिए चलाने वाले साबुन नहीं हैं। ये किसी खास स्थिति के लिए हैं, और उसी हिसाब से इन्हें चुनना चाहिए।
Medimix Ayurvedic Classic 18 Herbs

सीधी बात: तैलीय त्वचा और शरीर पर निकलने वाले दानों के लिए सबसे जाना-पहचाना आयुर्वेदिक विकल्प।
ये हरे रंग का साबुन भारतीय घरों में दशकों से है और इसकी पहचान इसकी तेज़ हर्बल गंध है।
इसमें है क्या और वो करता क्या है: इसमें 18 जड़ी-बूटियों का मिश्रण और नारियल तेल का आधार है। इनमें नीम जैसी सामग्री शामिल है, जो पारंपरिक रूप से त्वचा की सफाई के लिए इस्तेमाल होती आई है। इसका घोषित TFM आमतौर पर 60 से 70 प्रतिशत के बीच बताया जाता है, यानी ये ग्रेड 2 या ग्रेड 3 श्रेणी में आता है।
नहाते वक्त कैसा लगता है: झाग मध्यम बनता है और हर्बल गंध बहुत तेज़ है, जो लोगों को या तो बहुत पसंद आती है या बिल्कुल नहीं। नहाने के बाद त्वचा साफ और हल्की सूखी महसूस होती है।
कितने का है और कितने दिन चलेगा: 75 ग्राम और 125 ग्राम में मिलता है और कीमत किफायती श्रेणी में है।
ये किन लोगों के लिए है: तैलीय त्वचा। जिनकी पीठ, कंधों या छाती पर दाने निकलते हैं। गर्मी और मानसून के महीने, जब पसीना और चिपचिपाहट बढ़ जाती है।
ये किन लोगों के लिए नहीं है: रूखी और संवेदनशील त्वचा। ये साबुन सफाई की तरफ झुका हुआ है, नमी की तरफ नहीं, और सर्दियों में रूखी त्वचा पर ये खिंचाव बढ़ा सकता है।
एक बात जो डिब्बे पर नहीं लिखी होती: आयुर्वेदिक होने का मतलब अपने आप कोमल होना नहीं है। कई हर्बल साबुन सफाई के मामले में काफी तेज़ होते हैं, और यही कारण है कि वो तैलीय त्वचा पर अच्छे लगते हैं और रूखी त्वचा पर नहीं।
पूरा फायदा चाहिए तो ये कीजिए: अगर शरीर पर दाने निकलते हैं तो नहाने के बाद तौलिया बदलते रहिए और ढीले सूती कपड़े पहनिए। अकेला साबुन इस समस्या का पूरा हल नहीं है।
Dettol Original

सीधी बात: उन हालात के लिए बना साबुन जहां सफाई असल में मायने रखती है, जैसे बीमारी, चोट या बहुत गंदगी वाला काम।
Dettol भारत में सफाई का पर्याय बन चुका है और इसकी पहचान उस तेज़ दवा जैसी गंध से है।
इसमें है क्या और वो करता क्या है: इसमें क्लोरोक्सिलेनॉल नाम का एंटीसेप्टिक तत्व है, जो बैक्टीरिया को कम करने के लिए इस्तेमाल होता है। इसका घोषित TFM आमतौर पर 70 प्रतिशत के आसपास बताया जाता है, यानी ग्रेड 2 श्रेणी।
नहाते वक्त कैसा लगता है: झाग अच्छा बनता है और गंध बहुत साफ पहचानी जाती है। नहाने के बाद त्वचा एकदम साफ महसूस होती है, और यही एहसास बहुत लोगों को भरोसा देता है।
कितने का है और कितने दिन चलेगा: 75 ग्राम और 125 ग्राम में मिलता है और कीमत किफायती श्रेणी में है।
ये किन लोगों के लिए है: वो हालात जहां सफाई असल में मायने रखती है, जैसे अस्पताल से लौटने के बाद, किसी संक्रमण के दौरान, कसरत या खेल के बाद, या गंदगी वाले काम के बाद।
ये किन लोगों के लिए नहीं है: रूखी और संवेदनशील त्वचा। साथ ही वो लोग जो इसे रोज़, पूरे शरीर पर, सालभर इस्तेमाल करते हैं।
एक बात जो डिब्बे पर नहीं लिखी होती: ये सबसे ज़रूरी बात है। स्वस्थ त्वचा पर रोज़ एंटीबैक्टीरियल साबुन लगाना ज़्यादातर लोगों के लिए ज़रूरी नहीं होता। त्वचा पर मौजूद सामान्य बैक्टीरिया का अपना संतुलन होता है, और रोज़ाना एंटीसेप्टिक इस्तेमाल रूखापन बढ़ा सकता है। इसे ज़रूरत के हिसाब से चुनिए, आदत के हिसाब से नहीं।
पूरा फायदा चाहिए तो ये कीजिए: अगर आपको इसकी गंध और एहसास पसंद है तो कसरत या बाहर के काम के बाद इस्तेमाल कीजिए, और बाकी दिनों में कोई हल्का विकल्प रखिए।
अपने लिए सही साबुन 5 कदम में चुनिए
1. पहले तय कीजिए कि आपकी त्वचा रूखी है या तैलीय
सबसे आसान जांच नहाने के बाद वाला एहसास है। अगर नहाने के दस मिनट बाद त्वचा खिंची हुई लगती है या पिंडलियों पर सफेद लकीरें दिखती हैं, तो आपकी त्वचा रूखी है और आपको भाग 1 वाले विकल्प चाहिए। अगर दिन के अंत तक त्वचा चिपचिपी लगती है या पीठ पर दाने निकलते हैं, तो भाग 2 और 3 वाले विकल्प ज़्यादा काम के हैं।
2. फिर रैपर पलटकर श्रेणी देखिए
“टॉयलेट साबुन” लिखा है तो TFM का नंबर मिलेगा और वो बार असली साबुन है। “बाथिंग बार” लिखा है तो वो सिंडेट श्रेणी का है और उसका pH त्वचा के ज़्यादा करीब हो सकता है। रूखी त्वचा के लिए दूसरा विकल्प अक्सर बेहतर बैठता है।
3. मौसम को हिसाब में रखिए
भारत में एक ही साबुन सालभर चलाना ज़्यादातर लोगों के लिए मुश्किल है। नवंबर से फरवरी की सूखी ठंड में हल्का विकल्प रखिए और गर्मी व मानसून में ताज़गी वाला। दो साबुन रखना फिज़ूलखर्ची नहीं, बल्कि उसी बजट का बेहतर इस्तेमाल है।
4. खुशबू को लेकर ईमानदार रहिए
अगर आपको नहाने के बाद खुजली होती है और आपने कभी इसकी वजह नहीं ढूंढी, तो सबसे पहले खुशबू पर शक कीजिए। दो हफ्ते किसी खुशबू-रहित विकल्प पर जाकर देखिए।
5. कीमत को चलने की अवधि के साथ जोड़िए
ऊंचे TFM वाले कड़े साबुन धीरे घुलते हैं और लंबा चलते हैं। ग्लिसरीन और क्रीम वाले बार तेज़ी से घुलते हैं। इसलिए महंगा और सस्ता तय करने से पहले ये देखिए कि एक टिकिया कितने दिन चलती है, और साबुनदानी ऐसी रखिए जिसमें पानी न रुके।
आखिर में
साबुन का फैसला उतना छोटा नहीं है जितना लगता है, क्योंकि यही एक प्रोडक्ट रोज़, पूरे शरीर पर, सालों तक लगता है।
तीन काम कीजिए। पहले नहाने के बाद का एहसास देखकर तय कीजिए कि आपकी त्वचा रूखी है या तैलीय। फिर दुकान पर रैपर पलटकर देखिए कि वो टॉयलेट साबुन है या बाथिंग बार, और TFM का नंबर क्या कहता है। और आखिर में, चाहे कोई भी साबुन हो, नहाने के 3 मिनट के अंदर बॉडी लोशन लगाने की आदत डाल लीजिए।
सबसे महंगा साबुन सबसे अच्छा नहीं होता। सबसे अच्छा वो होता है जो आपकी त्वचा से कम से कम छीने।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
TFM क्या होता है?
TFM यानी Total Fatty Matter, साबुन में मौजूद असली फैटी पदार्थ का प्रतिशत। जितना ज़्यादा TFM, उतना ज़्यादा असली साबुन और उतना कम भराव।
Grade 1, 2 और 3 साबुन में क्या फर्क है?
BIS के मानकों के अनुसार Grade 1 साबुन में कम से कम 76% TFM होता है, Grade 2 में 70% और Grade 3 में 60%।
टॉयलेट साबुन और बाथिंग बार में क्या अंतर है?
टॉयलेट साबुन पारंपरिक साबुन है और उसके रैपर पर TFM लिखा होता है। बाथिंग बार में हल्के सिंथेटिक सर्फेक्टेंट होते हैं, इसलिए उसका pH त्वचा के ज़्यादा करीब हो सकता है।
क्या ज़्यादा TFM वाला साबुन हमेशा बेहतर होता है?
नहीं। ज़्यादा TFM का मतलब ज़्यादा असली साबुन और ज़्यादा क्षारीय pH, जो रूखी या संवेदनशील त्वचा पर खिंचाव बढ़ा सकता है।
रूखी त्वचा के लिए कौन सा साबुन अच्छा है?
बाथिंग बार या सिंडेट बार, खासकर खुशबू-रहित, जैसे Sebamed, Cetaphil या Dove। ये सफाई करते हुए त्वचा की चिकनाई कम छीनते हैं।
तैलीय त्वचा और शरीर पर दानों के लिए कौन सा साबुन चुनें?
Medimix जैसा हर्बल साबुन या Cinthol जैसा ताज़गी वाला साबुन बेहतर रहता है। साथ में ढीले सूती कपड़े पहनें और तौलिया बदलते रहें।
